पटना: बिहार की धरती प्रतिभाओं से भरी हुई है और मुजफ्फरपुर जिले के कांटी प्रखंड के एक छोटे से गांव के 11 वर्षीय अंश मिश्रा इसका शानदार उदाहरण हैं। कम उम्र में ही अंश अपनी अनोखी मिमिक्री और भोजपुरी गायकी से लोगों का दिल जीत रहे हैं।
अंश की सबसे बड़ी खासियत है पशु-पक्षियों की आवाजों की हूबहू नकल करना। वह करीब 90 तरह की आवाजें निकाल सकते हैं। गाय, बकरी, कुत्ता, बिल्ली, कौआ और कोयल समेत कई जीव-जंतुओं की आवाजों को इतनी सटीकता से दोहराते हैं कि असली और नकली में फर्क करना मुश्किल हो जाता है। अंश का कहना है कि हर जानवर की खुशी, डर और गुस्से की आवाज अलग होती है, जिसे समझकर वह उनकी नकल करते हैं।
मिमिक्री के साथ-साथ अंश एक बेहतरीन भोजपुरी लोकगायक भी हैं। शादी-विवाह और विदाई जैसे पारंपरिक लोकगीतों को वह पूरे भाव और सुर के साथ गाते हैं। उनकी गायकी में भोजपुरी संस्कृति की मिठास साफ झलकती है। यही वजह है कि कम समय में उन्होंने अपनी अलग पहचान बना ली है।
अंश कई बड़े भोजपुरी कलाकारों के साथ मंच साझा कर चुके हैं। उन्होंने पवन सिंह, खेसारी लाल यादव, अरविंद अकेला कल्लू और निरहुआ जैसे चर्चित कलाकारों के कार्यक्रमों में प्रस्तुति दी है। इसके अलावा वह लालू प्रसाद यादव, चिराग पासवान और अखिलेश यादव जैसे नेताओं की आवाज की भी शानदार नकल करते हैं। लालू यादव के सामने उनकी मिमिक्री को खूब सराहना मिली थी।
अंश बताते हैं कि गांव का माहौल उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा रहा है। बचपन से पशु-पक्षियों की आवाजें सुनकर उन्होंने अभ्यास शुरू किया और धीरे-धीरे यह कला उनकी पहचान बन गई। पिछले दो वर्षों से वह लगातार स्टेज शो कर रहे हैं और उनके कुछ गीतों के एल्बम भी रिलीज हो चुके हैं।
अंश की सफलता में उनके पिता मनोज मिश्रा का बड़ा योगदान है। बेटे की प्रतिभा को निखारने के लिए उन्होंने अपना पेशा तक बदल दिया। परिवार अब अंश के लिए एक अच्छे संगीत गुरु की तलाश में है। अंश का सपना भोजपुरी संगीत और फिल्मों की दुनिया में बड़ा नाम कमाकर बिहार की लोकसंस्कृति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है।