सावन के पावन महीने में बाबा भोलेनाथ के जलाभिषेक के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में कांवरिया सुल्तानगंज पहुंच रहे हैं। नमामि गंगे घाट से लेकर कच्ची कांवरिया पथ तक इन दिनों आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। इसी बीच एक अनोखी कांवर श्रद्धालुओं और राहगीरों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
पटना के मछुआटोली से आए मल्लाह कांवरिया संघ की यह कांवर अपनी अनूठी थीम को लेकर चर्चा में है। कांवर में कछुए के ऊपर महाकाल की प्रतिमा को विराजमान कराया गया है। इसके साथ ही कांवर को विभिन्न जीव-जंतुओं की आकृतियों से सजाया गया है। दूर से देखने पर यह कांवर न केवल भव्य नजर आती है, बल्कि पर्यावरण और जीव-जंतुओं के संरक्षण का संदेश भी देती है।
कांवरिया संघ से जुड़े श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान शिव प्रकृति और समस्त जीव-जंतुओं से प्रेम करते हैं। इसलिए बाबा भोलेनाथ को जल अर्पित करने के साथ लोगों तक पर्यावरण संरक्षण का संदेश पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। श्रद्धालुओं ने कहा कि पेड़-पौधों, नदियों और जीव-जंतुओं की रक्षा करना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
सुल्तानगंज के गंगाधाम से पवित्र गंगाजल लेकर यह कांवरिया संघ पैदल बाबाधाम देवघर की यात्रा पर निकला है। रास्ते में आकर्षक कांवर को देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट रही है। कांवरिया भगवान शिव का जयकारा लगाते हुए आगे बढ़ रहे हैं और वातावरण हर-हर महादेव के उद्घोष से गूंज रहा है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि सावन की यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझाने का भी अवसर है। अनोखी कांवर के माध्यम से दिया जा रहा पर्यावरण संरक्षण और जीव-जंतुओं की रक्षा का संदेश लोगों को खासा प्रभावित कर रहा है।






