दीपेश कुमार, जिला पदाधिकारी, सहरसा और गौरव कुमार, उप विकास आयुक्त, ने संयुक्त रूप से 24 मार्च, 2026 को विश्व यक्ष्मा दिवस के अवसर पर समाहरणालय, सहरसा से हरी झंडी दिखाकर जागरूकता रैली का शुभारंभ किया। यह रैली समाहरणालय से शुरू होकर रमेश झा महिला कॉलेज, जिला स्वास्थ्य समिति होते हुए सदर अस्पताल, सहरसा में समाप्त हुई।

 

रैली में जी.एन.एम., ए.एन.एम., और पारा मेडिकल के छात्र-छात्राओं ने टीबी रोकथाम के महत्व पर जोर देने वाले स्लोगन के माध्यम से आमजन को जागरूक किया। जिला पदाधिकारी ने रैली के दौरान “टीबी मुक्त भारत” अभियान के तहत हैंड होल्ड X-Ray मशीन को हरी झंडी दिखाई और इसके माध्यम से टीबी रोगियों की शीघ्र पहचान एवं समय पर उपचार की जानकारी साझा की।

 

इस आधुनिक तकनीक से युक्त मशीन अब जिले के विभिन्न क्षेत्रों में भेजी जाएगी। इसके माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग कर टीबी रोग का प्रारंभिक पता लगाने और तुरंत इलाज सुनिश्चित करने की सुविधा उपलब्ध होगी।

 

साथ ही, सहरसा जिले में 100 दिवसीय टीबी उन्मूलन अभियान (100 Days Campaign) की विधिवत शुरुआत की गई। प्रत्येक प्रखंड के लिए विस्तृत माइक्रोप्लान तैयार किया गया है, जिससे उच्च जोखिम समुदायों में विशेष अभियान चला कर टीबी मरीजों की पहचान और समय पर उपचार सुनिश्चित किया जा सके।

 

जिले में 1st Line ईलाजरत यक्ष्मा रोगियों की संख्या 5,087 है, जबकि 2nd Line ईलाजरत रोगियों की संख्या 25 है। सिविल सर्जन ने बताया कि जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में टीबी रोगियों के लिए मुफ्त जांच और निःशुल्क दवा उपलब्ध है। उच्च जोखिम क्षेत्रों में सक्रिय खोज अभियान (ACF) के माध्यम से टीबी नियंत्रण को और सशक्त बनाया जाएगा।

 

जिला यक्ष्मा केंद्र के संचारी रोग पदाधिकारी ने कहा कि समय पर इलाज और पौष्टिक आहार से टीबी पर पूर्ण नियंत्रण पाया जा सकता है। उन्होंने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि वर्ष 2030 तक टीबी पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त हो जाएगा।

 

इस अवसर पर डॉ. हरी शेखर भारती, डॉ. एस.के. आजाद, श्री बिनय रंजन, श्री सनोज कुमार, और अन्य अधिकारी एवं स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित थे।

 

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