नई दिल्ली: वरिष्ठ IAS अधिकारी दीप्ति गौड़ मुखर्जी ने बुधवार को शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के सचिव का पदभार संभाल लिया। इससे पहले वह कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय में सचिव की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। 1993 बैच की मध्य प्रदेश कैडर की अधिकारी मुखर्जी प्रशासन के साथ-साथ शिक्षा क्षेत्र में भी लंबा अनुभव रखती हैं।
उच्च शिक्षा विभाग देश के विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों से जुड़ी नीतियां तैयार करने और उन्हें लागू करने के लिए जिम्मेदार है। विभाग उच्च शिक्षा की फंडिंग, शिक्षा की पहुंच और गुणवत्ता, छात्रों एवं फैकल्टी से जुड़े मुद्दों, शोध, संस्थागत विकास और शिक्षा सुधारों पर काम करता है। साथ ही, यह UGC और केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता पाने वाले संस्थानों के साथ समन्वय भी करता है।
सचिव के रूप में मुखर्जी की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की उच्च शिक्षा नीतियों और कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करने की होगी। उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में कई बड़े बदलाव चल रहे हैं। इनमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति यानी NEP 2020 के प्रावधानों को व्यापक स्तर पर लागू करना प्रमुख है।
मुखर्जी मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग और राज्य शिक्षा मिशन सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुकी हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने बच्चों के सीखने के परिणाम बेहतर करने और पढ़ने की आदत को बढ़ावा देने वाली योजनाओं पर काम किया। ‘मिल बांचे’ और ‘कहानी उत्सव’ जैसी पहलों में भी उनकी भूमिका रही।
शिक्षा विभाग में कार्य करने के बाद मुखर्जी ने नेशनल हेल्थ अथॉरिटी की CEO के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई। अगस्त 2024 में उन्होंने कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के सचिव का पद संभाला था।
अब उच्च शिक्षा विभाग की नई जिम्मेदारी के साथ उनसे शिक्षा व्यवस्था में चल रहे सुधारों को गति देने की उम्मीद है। परीक्षा और दाखिले में सुधार, संस्थागत पुनर्गठन, शोध को बढ़ावा देना और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, पहुंच तथा गवर्नेंस को मजबूत करना उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हो सकता है।






