जमुई: बिहार की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों के बीच जमुई सदर अस्पताल से सामने आई एक तस्वीर ने सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां 75 वर्षीय बुजुर्ग मरीज को सीटी स्कैन कराने के लिए स्ट्रेचर नहीं मिला, तो मजबूर होकर उनके बेटे ने उन्हें अपनी गोद में उठाकर डॉक्टर और जांच केंद्र तक पहुंचाया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
जानकारी के अनुसार, सोनो प्रखंड के चुरहैत निवासी सदानंद सिंह अपने पिता रंजय सिंह को बुखार और निमोनिया की शिकायत के बाद जमुई सदर अस्पताल लेकर पहुंचे थे। डॉक्टर ने जांच के बाद बुजुर्ग की स्थिति को देखते हुए सीटी स्कैन कराने की सलाह दी। इसके बाद परिजन उन्हें जांच केंद्र तक ले जाने के लिए स्ट्रेचर खोजने लगे।
सदानंद सिंह का आरोप है कि अस्पताल में काफी देर तक स्ट्रेचर की तलाश करने के बावजूद उन्हें कोई मदद नहीं मिली। उन्होंने बताया कि एक स्ट्रेचर मौजूद था, लेकिन उस पर पहले से शव रखा हुआ था। ऐसे में पिता को उस स्ट्रेचर से ले जाना संभव नहीं था। इलाज में देरी होती देख आखिरकार उन्होंने अपने पिता को गोद में उठाया और सीटी स्कैन के लिए लेकर पहुंचे।
इस घटना ने अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का कहना है कि अगर जरूरत के समय स्ट्रेचर जैसी सामान्य सुविधा भी उपलब्ध नहीं होगी, तो गंभीर मरीजों को कितनी परेशानी झेलनी पड़ेगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
मामले में जमुई सदर अस्पताल के डिप्टी सुपरीटेंडेंट डॉ. तनिष्क कुमार ने बताया कि घटना की जानकारी मिली है। ड्यूटी पर तैनात दो ट्रॉली मैन से स्पष्टीकरण मांगा गया है। उनसे पूछा गया है कि आखिर मरीज को समय पर स्ट्रेचर क्यों नहीं मिला। जवाब मिलने के बाद मामले की जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार सिंह ने कैमरे पर बयान देने से इनकार किया। हालांकि, उन्होंने ऑफ कैमरा कहा कि मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। अब सवाल यही है कि अस्पताल में पर्याप्त स्ट्रेचर थे तो मरीज तक समय पर क्यों नहीं पहुंचे और अगर नहीं थे, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है?






