हैदराबाद: ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखने लगा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य, जो दुनिया में तेल आपूर्ति की सबसे अहम लाइफलाइन माना जाता है, वहां से तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होने लगी है। ईरान द्वारा टैंकरों की निकासी पर रोक लगाए जाने से कई देशों में तेल संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है, जिसका असर भारत में भी देखने को मिल रहा है।

भारत में प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में 2.09 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, एलपीजी की किल्लत ने आम लोगों के साथ-साथ होटल और रेस्तरां उद्योग को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है।

अगर वैश्विक खपत की बात करें तो दुनिया में रोजाना करीब 101 से 102 मिलियन बैरल यानी 15.9 अरब लीटर कच्चे तेल की खपत होती है। इसमें सबसे ज्यादा खपत अमेरिका, चीन और भारत में होती है। अमेरिका में प्रतिदिन लगभग 20 मिलियन बैरल, जबकि चीन में करीब 240 करोड़ लीटर तेल का उपयोग होता है।

भारत की बात करें तो देश में रोजाना लगभग 55 से 60 लाख बैरल यानी करीब 90 करोड़ लीटर तेल की खपत होती है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है और अपनी जरूरत का करीब 85 से 88 प्रतिशत तेल रूस, इराक और सऊदी अरब से आयात करता है। परिवहन और औद्योगिक विकास के कारण देश में तेल की मांग लगातार बढ़ रही है।

दुनिया में तेल के भंडार की स्थिति भी चिंता का विषय है। 2025 तक वैश्विक स्तर पर करीब 1.77 ट्रिलियन बैरल सिद्ध तेल भंडार मौजूद है। मौजूदा खपत दर के अनुसार यह भंडार लगभग 47 वर्षों तक चल सकता है।

इसी वजह से अब दुनिया भर में नवीकरणीय ऊर्जा जैसे सौर और पवन ऊर्जा की ओर तेजी से रुख किया जा रहा है। आने वाले समय में ऊर्जा सुरक्षा के लिए वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भरता बढ़ना तय माना जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *