पटना में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और पेड़ों की कटाई के बीच पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पर्यावरणविद् नरेश अग्रवाल एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरे हैं। वे वर्षों से हरियाली बढ़ाने, पक्षियों के संरक्षण और आवारा पशुओं की देखभाल के लिए लगातार काम कर रहे हैं। उनकी पहल न केवल राजधानी पटना बल्कि पूरे बिहार के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है।
नरेश अग्रवाल अपने दिन की शुरुआत पौधों की सेवा से करते हैं। सुबह तैयार होने के बाद वे बाइक पर पानी, खाद और पौधे लेकर शहर की सड़कों पर निकल पड़ते हैं। जहां भी उन्हें खाली जमीन दिखाई देती है, वहां पौधे लगाते हैं और पहले से लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल भी करते हैं। उनका मानना है कि केवल पौधारोपण करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पौधों को पेड़ बनने तक सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है।
अब तक वे पटना और आसपास के इलाकों में सैकड़ों पौधे लगा चुके हैं। इसके साथ ही उन्होंने अपने घर की छत पर एक सुंदर रूफटॉप गार्डन विकसित किया है, जिसमें फूलों, औषधीय पौधों और विभिन्न प्रजातियों के पेड़-पौधे लगाए गए हैं। यह लोगों को सीमित जगह में भी हरियाली बढ़ाने का संदेश देता है।
पक्षियों के संरक्षण के लिए नरेश अग्रवाल कृत्रिम घोंसले बनाकर पेड़ों पर लगाते हैं और उनके लिए दाना-पानी की व्यवस्था भी करते हैं। गर्मी के मौसम में वे विशेष अभियान चलाकर लोगों को पक्षियों के लिए पानी रखने के लिए प्रेरित करते हैं। खास अवसरों पर वे लोगों को पौधे और कृत्रिम घोंसले उपहार में भी देते हैं।
पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ पशु सेवा भी उनके मिशन का अहम हिस्सा है। वे आवारा पशुओं की देखभाल करते हैं और समाज को उनके प्रति संवेदनशील बनने का संदेश देते हैं।
इसके अलावा नरेश अग्रवाल घरेलू जैविक कचरे से खाद तैयार करते हैं और उसका उपयोग पौधों में करते हैं। वे 3R यानी रिड्यूस, रीयूज और रिसाइकिल के सिद्धांत को बढ़ावा देते हुए लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक कर रहे हैं। उनकी यह मुहिम स्वच्छ, हरित और संतुलित पर्यावरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।