सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल में सरकारी राशन वितरण की पोल खुल गई है। यहाँ के कार्डधारकों का कहना है कि उन्हें उनके हक का पूरा राशन नहीं मिल रहा है। 5 किलो अनाज के बजाय सिर्फ 4 किलो दिया जा रहा है, यानी सीधे तौर पर 20 फीसदी की कटौती हो रही है। बढ़ती महंगाई के बीच यह कटौती गरीब परिवारों के लिए भारी चिंता का कारण बन गई है।
जब इस बारे में सरकारी डीलर से बात की गई, तो उन्होंने एक चौंकाने वाला बयान दिया। डीलर का कहना है कि यह कटौती उनकी मर्जी से नहीं की जा रही। उनके मुताबिक, सिमरी बख्तियारपुर स्थित FCI (फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) के गोदाम से ही अनाज कम वजन में आता है। डीलर ने कहा, “हम अपनी जेब से घाटा सहकर पूरा 5 किलो कैसे दे सकते हैं? जितनी आपूर्ति होती है, उतने के हिसाब से ही राशन दिया जा रहा है।”
इस बयान ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा कर दिया है। अगर डीलर की बात सही है, तो संभव है कि FCI गोदाम या आपूर्ति विभाग के स्तर पर कोई खेल चल रहा हो। सवाल उठता है कि क्या गोदाम से अनाज निकलते समय सही तौल नहीं की जा रही है? क्या अधिकारी और प्रबंधक मिलकर राशन की चोरी कर रहे हैं?
स्थानीय लोग नाराज हैं और इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। कार्डधारकों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही उन्हें पूरा राशन नहीं मिला और इस धांधली की जांच नहीं हुई, तो वे सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
इस मामले पर अभी तक संबंधित विभाग के आला अधिकारियों की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लोग अब अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) और प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (BSO) से शिकायत करने की योजना बना रहे हैं।
सिमरी बख्तियारपुर में यह घटना यह दिखाती है कि सरकारी दावे ‘हर घर राशन’ और पारदर्शी वितरण प्रणाली के केवल कागजों में ही सीमित हैं। जमीन पर गरीबों के निवाले पर लगातार संकट और मनमानी जारी है। प्रशासन और आपूर्ति विभाग की चुप्पी से लोगों में नाराजगी और बढ़ रही है, और अब उनका धैर्य धीरे-धीरे खत्म हो रहा है।
सिमरी बख्तियारपुर नगर परिषद क्षेत्र में यह मामला गंभीर चिंता का विषय बन गया है और उच्चस्तरीय हस्तक्षेप की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
