भारत के जॉब मार्केट में तेजी से बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। ‘फिटफाउंड साइट्स इन ट्रैकर’ की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अब लगभग हर तीन में से एक जॉब पोस्टिंग में बेरोजगार ऐसे साथियों को पार्टिसिपेट दे रहे हैं, जो तुरंत काम सहायक सहायक बन जाते हैं। यानी, लंबे समय से इंटरनेट वाले गेम्स की तुलना में ‘इमीडिएट जॉइनर्स’ की मांग तेजी से बढ़ रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, सोसायटी की हायरिंग में विविधता और उपलब्धता के बीच अंतर लगातार बढ़ रहा है। ‘एम्प्लॉयर हैरिंग आर्सेनी स्टिक’ 2022 के 100 से 2026 में 158 तक पहुंच गया है, जबकि तुरंत जॉइन करने वाले एब्सेनी का एस्टर केवल 112 तक ही पहुंच पाया है। यह साफ संकेत है कि जॉब मार्केट में ‘ऑस्ट्रेलियाई लैपटॉप’ को मजबूती से रखा जा रहा है। 2022 के बाद कंपनी की बेस्ट हायरिंग की मांग में 58% की वृद्धि दर्ज की गई।

मिड-लेवल प्रोफेशनल्स (3 से 6 साल के अनुभव वाले) की मांग सबसे ज्यादा देखी जा रही है। फाउंडिट की वीपी-मार्केटिंग अनुपमा भीमराजका के अनुसार, ऐसे प्रतियोगी चाहते हैं जो कम समय में काम शुरू कर सकें और तुरंत काम शुरू कर सकें। कुल हेयरिंग डिजायनों का करीब 40% हिस्सा समान श्रेणी से आता है, क्योंकि ये पेशेवर बिना मुख्य प्रशिक्षण के जिम्मेदारियां निभा सकते हैं।

आईटी बी और एफ सैटेलाइट सेक्टर में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के बीच सबसे बड़ा अंतर देखने को मिला है। सख्त प्रोजेक्ट डेडलाइन के निर्माता अब क्रैथल हैरिंग, गिग वर्कर्स और पहले से तैयार सीबीआर्इ पीपुल का सहारा ले रही हैं। आंकड़ों के मुताबिक, 27% अभ्यर्थियों को 15 दिनों के अंदर जॉइनिंग की जरूरत है, जबकि केवल 14% अभ्यर्थी ही इतने कम समय में उपलब्ध हैं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि देश के टॉप मेट्रो शहरों में 75% की मांग है। हालाँकि, टियर-2 और टियर-3 शहरों में ‘इमीडिएट जॉइनर्स’ की कीकीनाइन्टेड बेहतर है, जिससे ये सिटी एसोसिएशन के लिए नए अवसर के रूप में उभर रहे हैं।

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