बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मधुबनी में तैनात बिजली विभाग के एक इंजीनियर के ठिकानों पर छापेमारी की है। इस कार्रवाई में करोड़ों रुपये की अवैध संपत्ति का खुलासा हुआ है, जिससे विभागीय तंत्र में हड़कंप मच गया है।
जानकारी के अनुसार, EOU की टीम ने इंजीनियर मनोज कुमार रजक के सात अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। ये ठिकाने दरभंगा, मधुबनी और सुपौल जिलों में स्थित हैं, जहां टीम ने उनके आवासीय और व्यावसायिक परिसरों की गहन तलाशी ली। शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि इंजीनियर के पास उनकी वैध आय से करीब 62 प्रतिशत अधिक संपत्ति मौजूद है, जो स्पष्ट रूप से आय से अधिक संपत्ति का मामला बनता है।
छापेमारी के दौरान सबसे चौंकाने वाला खुलासा संपत्तियों को लेकर हुआ। जांच टीम को 17 अलग-अलग जमीन और प्लॉट के दस्तावेज मिले हैं, जिनकी बाजार कीमत 3 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है। ये संपत्तियां बिहार के अररिया, सुपौल और दरभंगा के अलावा पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में भी स्थित हैं।
इतना ही नहीं, जांच में यह भी सामने आया कि इंजीनियर ने पड़ोसी देश नेपाल के सुनसरी इलाके में जमीन खरीदकर वहां एक आलीशान बंगले का निर्माण कार्य शुरू कराया है। इसके अलावा सुपौल के करजाईन में तीन होटलों का संचालन, निर्मली में एक गोदाम और दरभंगा में पेट्रोल पंप के लिए लीज पर ली गई जमीन की जानकारी भी जांच टीम को मिली है। इससे साफ है कि इंजीनियर ने अपनी आय से कहीं अधिक संपत्ति विभिन्न माध्यमों से अर्जित की है।
इस पूरे मामले में इंजीनियर के भाई संजय रजक की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। EOU ने उन्हें सह-अभियुक्त बनाया है। जांच में खुलासा हुआ है कि संजय रजक के नाम पर एक गैस एजेंसी संचालित की जा रही है। आरोप है कि गैस एजेंसी के नाम पर खरीदी गई एक स्कॉर्पियो गाड़ी को सरकारी काम में उपयोग दिखाकर विभाग से अवैध रूप से भुगतान लिया जा रहा था। इस तरह जालसाजी के जरिए सरकारी धन का दुरुपयोग भी सामने आया है।
छापेमारी के दौरान टीम को 1 लाख 5 हजार रुपये नकद और विभिन्न बैंक खातों में जमा करीब 4 लाख 25 हजार रुपये की जानकारी भी मिली है। इसके अलावा कई अहम दस्तावेज, जमीन के कागजात और निवेश से जुड़े सबूत भी बरामद किए गए हैं, जिनकी अब बारीकी से जांच की जा रही है।
EOU ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली है और आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि यह जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और जैसे-जैसे नए तथ्य सामने आएंगे, कार्रवाई और तेज की जाएगी।
इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की सख्त नीति का हिस्सा माना जा रहा है। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में ऐसे मामलों में और भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी, ताकि सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
कुल मिलाकर, EOU की इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ एजेंसियां सक्रिय हैं और अवैध संपत्ति अर्जित करने वालों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
