पटना में गेस्ट गैस की भारी तबाही ने छात्रों और छात्रों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण गैस स्टेशन प्रभावित हुआ है, जिसका असर अब बिहार की राजधानी समेत पूरे राज्य में दिख रहा है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि पटना के करीब 3000 निजी छात्र-छात्राएं बंद स्थिति में पहुंच गए हैं, जिससे करीब 2.5 लाख छात्रों की पढ़ाई पर संकट मंडरा रहा है।
दोस्तों की रसोई के करीब मशीनरी हो चुकी है। जहां पहले बड़े पैमाने पर रसोई में गैस चूल्हों पर तेजी से खाना बनता था, अब वहीं दोस्त है। कई सहायक अध्यापकों को जबरन कोयले और लकड़ी के चूल्हे का सहारा लेना पड़ रहा है। एक गर्ल्स स्टूडेंट की संचालिका विंद के अनुसार, उनके यहां करीब 250 स्टूडेंट रहते हैं, जहां रोजाना रहने के लिए दो स्टूडेंट स्टूडेंट की जरूरत होती थी। लेकिन गैस नहीं मिलने से अब पूरा सिस्टम प्रभावित हो गया है।
कैली के चूल्हों पर खाना बनाने से समय और मेहनत दोनों बढ़ गईं। रसोइयों का कहना है कि जहां गैस पर जल्दी खाना बन जाता था, वहीं अब महंगाई और महंगाई की समस्या बढ़ गई है। इसका सीधा प्रभाव छात्रों पर पड़ता है, विशेष रूप से उन छात्रों पर जिनमें सुबह कोचिंग और क्लास के लिए जल्दी पढ़ाई होती है।
छात्र भी इस संकट से जूझ रहे हैं। बाहर के रेस्तरां और स्ट्रीट रेस्तरां में भी गैस की कमी के कारण खाना नहीं मिल रहा है। कई जगह “गैस नहीं है” के बोर्ड लगे हुए हैं। छात्रों का कहना है कि पहले जहां 80-90 रुपये प्रति बच्चे में भरता था, अब 250 से 400 रुपये तक वसूले जा रहे हैं, जिससे ब्लैक मार्केटिंग का खतरा बढ़ गया है।
पटना नगर निगम के आंकड़े के अनुसार, शहर में 3035 कर्मचारी संचालित हैं, जिनमें सबसे ज्यादा बांकीपुर जोन में हैं। संकट में गैस के रहने से सभी पर असर पड़ रहा है और कई छात्र घर वापस जाने को मजबूर हो सकते हैं। यदि स्थिति शीघ्र नहीं है, तो पलायन की स्थिति बन सकती है।
