नेपाल की राजनीति में हाल ही में उभरे एक बयान को लेकर भारत-नेपाल सीमा से लगे बिहार में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। नेपाल के नए प्रधानमंत्री बेलेंद्र शाह द्वारा कथित तौर पर “ग्रेटर नेपाल” बनाने और नेपाल की तराई से सटे बिहार के बड़े हिस्से को अपने नक्शे में दिखाने के दावे ने लोगों के बीच बहस छेड़ दी है। इस बयान के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक हलकों तक तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
बताया जा रहा है कि ग्रेटर नेपाल की अवधारणा के तहत नेपाल के कुछ नेताओं द्वारा ऐसा नक्शा पेश किया गया है, जिसमें नेपाल की सीमा को बढ़ाकर भारत के कुछ हिस्सों तक दिखाया गया है। इसी को लेकर बिहार के लोगों ने भी चुटीले अंदाज में प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी है।
सोशल मीडिया पर एक कहावत का हवाला देते हुए लोग लिख रहे हैं—“मिल गया बंदूक तो बन गया हवलदार।” उसी अंदाज में कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि अभी-अभी प्रधानमंत्री बने बेलेंद्र शाह को ऐसे बड़े-बड़े दावे करने से पहले जमीनी हकीकत को समझना चाहिए।
बिहार के लोगों की तरफ से मजाकिया लहजे में यह भी कहा जा रहा है कि “भाई थोड़ा लिमिट में रहिए, नहीं तो कहीं ऐसा न हो कि बिहारी लोग ही नेपाल को बिहार में मिला दें।” इस तरह की टिप्पणियां सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रही हैं और लोग इसे हास्य-व्यंग्य के रूप में शेयर कर रहे हैं।
हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारत और नेपाल के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध बेहद मजबूत हैं। दोनों देशों के बीच खुली सीमा और आपसी सहयोग की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। ऐसे में किसी भी तरह के अतिरंजित बयान को गंभीरता से लेने की बजाय कूटनीतिक और व्यावहारिक दृष्टिकोण से देखने की जरूरत है।
इधर बिहार के लोगों ने भी अपने खास अंदाज में प्रतिक्रिया देते हुए लिखा—
“देख लेना, एक साल के अंदर अगर पूरा नेपाल बिहार न बन गया तो कहना।”
इसके साथ हंसी-मजाक वाले इमोजी भी खूब शेयर किए जा रहे हैं।
फिलहाल यह मुद्दा ज्यादा राजनीतिक बहस से ज्यादा सोशल मीडिया पर व्यंग्य और मजाक का विषय बना हुआ है, लेकिन सीमा और संप्रभुता से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता बरतने की जरूरत भी लगातार जताई जा रही है।
