नई दिल्ली: हिंदू धर्म में शक्ति की आराधना का महापर्व चैत्र नवरात्रि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च, गुरुवार से हो रही है। इसी दिन से हिंदू नववर्ष यानी विक्रम संवत 2083 का भी शुभारंभ होगा। इस पावन पर्व में नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधान से पूजा-अर्चना की जाती है।
पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को कलश स्थापना यानी घट स्थापना के साथ ही नवरात्रि का आरंभ होता है। इस दिन भक्त अपने घर और रसोई में कलश स्थापित कर मां दुर्गा का आह्वान करते हैं और पूरे नौ दिनों तक व्रत-पूजन करते हैं। नवरात्रि के दौरान मंदिर और गोदाम में भक्ति का विशेष निवास होता है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार प्रतिपदा तिथि 19 मार्च प्रातः 06 बजकर 52 मिनट से प्रारंभ होगी। कलश स्थापना के लिए प्रातःकाल का समय अत्यंत शुभ माना गया है। प्रातः 06:52 अपराह्न से 07:43 अपराह्न तक कलश स्थापना का श्रेष्ठ उत्सव रहेगा, जो लगभग 50 मिनट का होगा।
यदि किसी कारणवश इस समय कलश स्थापना नहीं की जा सकती है, तो वे अभिजीत उत्सव में भी पूजा कर सकते हैं। यह उत्सव दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा। शास्त्रों के अनुसार इस समय भी पूजा को अत्यंत शुभ और फलदायक माना जाता है।
नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इसके बाद क्रमशः माँ ब्रह्मचारिणी, माँ चंद्रघंटा, माँ कुष्मांडा, माँ स्कंदमाता, माँ कात्यायनी, माँ कालरात्रि, माँ महागौरी और माँ सिद्धिदात्री की मूर्तियाँ हैं।
नवरात्रि के दौरान पूरे नौ दिनों तक कई महत्वपूर्ण व्रत रखे जाते हैं, जबकि कुछ लोग पहले दिन और दुर्गा अष्टमी के दिन व्रत रखते हैं। इस साल दुर्गा अष्टमी 26 मार्च को मनाई जाएगी, जबकि महानवमी 27 मार्च को होगी। इन दोनों दिनों में कन्या पूजन और गृह का विशेष महत्व होता है।
28 मार्च, शनिवार को दशमी तिथि को सूर्योदय के बाद पारण कर अपना व्रत पूरा करेंगे। इसी के साथ मां दुर्गा की विशेष पूजा- स्तुति के साथ चैत्र नवरात्रि का समापन होगा।
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