गया: अंतरराष्ट्रीय और धार्मिक नगरी में पार्किंग की समस्या दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है। करीब 55 लाख आबादी वाले इस जिला मुख्यालय में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन समुचित पार्किंग व्यवस्था नहीं होने के कारण शहर की सड़कों पर रोजाना जाम की स्थिति बनी रहती है।

गया न केवल जिला मुख्यालय है, बल्कि मगध प्रमंडल के पांच जिलों का प्रमुख केंद्र भी माना जाता है। अनुमान है कि प्रतिदिन करीब पांच लाख लोगों का शहर में आवागमन होता है और एक लाख से अधिक छोटे-बड़े वाहन सड़कों पर चलते हैं। इसके बावजूद शहर में व्यवस्थित पार्किंग की सुविधा नहीं है। नतीजतन लोग मजबूरी में अपने वाहन सड़क किनारे खड़े कर देते हैं, जिससे ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित होती है और जाम की समस्या बढ़ जाती है।

शहर के प्रमुख बाजारों और व्यस्त सड़कों पर स्थिति ज्यादा खराब है। जीबी रोड, केपी रोड, चौक रोड, कोतवाली रोड, कचहरी रोड और टेकारी रोड जैसे इलाकों में सड़कें अस्थायी पार्किंग में बदल गई हैं। जहां वाहन नहीं खड़े होते, वहां फुटपाथी दुकानदारों और लावारिश पशुओं का कब्जा देखा जाता है। इससे सड़कें संकरी हो जाती हैं और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।

जिला पुलिस के अनुसार जनवरी और फरवरी 2026 में गया जिले में कुल 103 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें फरवरी में 58 दुर्घटनाओं में 37 लोगों की मौत हुई, जबकि जनवरी में 45 दुर्घटनाओं में 33 लोगों की जान गई। हालांकि ये आंकड़े पूरे जिले के हैं, लेकिन शहर में बढ़ती दुर्घटनाएं चिंता का विषय बन रही हैं।

एसपी का कहना है कि शहर में जाम की एक बड़ी वजह पार्किंग का अभाव, अतिक्रमण और फुटपाथ पर लगने वाली दुकानें हैं। प्रशासन की ओर से अतिक्रमण हटाने और नो-पार्किंग जोन लागू करने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।

वहीं नगर निगम आयुक्त के अनुसार शहर में पांच स्थानों पर पार्किंग बनाने की योजना तैयार की गई है। इनमें पीर मंसूर चौराहा, डीएम कार्यालय के पास, वी-मार्ट से रैन बसेरा तक, गांधी मैदान के पास चर्च का दक्षिणी हिस्सा और मिर्जा गालिब कॉलेज गोलंबर शामिल हैं।

नगर निगम का कहना है कि इन स्थानों पर सैकड़ों दोपहिया और चारपहिया वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था प्रस्तावित है। इसके साथ ही शहर में वेंडिंग जोन भी बनाए जाएंगे, ताकि फुटपाथी दुकानदारों को व्यवस्थित स्थान मिल सके और ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार हो सके।

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