भागलपुर। मालदा मंडल के मंडल रेल प्रबंधक श्री मनीष कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन तथा मालदा मंडल के राजभाषा विभाग के तत्वावधान में साहेबगंज रेलवे स्टेशन के सभाकक्ष में दो दिवसीय हिंदी कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में साहेबगंज रेलवे स्टेशन के विभिन्न विभागों और कार्यालयों के कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और राजभाषा हिंदी के प्रयोग से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त कीं।

 

कार्यक्रम की शुरुआत वरिष्ठ अनुवादक विद्यासागर राम द्वारा स्वागत भाषण के साथ हुई। उन्होंने उपस्थित अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला के उद्देश्य और महत्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में सहायक यांत्रिक अभियंता श्री पवन कुमार सिंह तथा मुख्य वक्ता के रूप में साहेबगंज कॉलेज के पूर्व प्राचार्य श्री रामजन्म मिश्र उपस्थित रहे।

 

मुख्य अतिथि श्री पवन कुमार सिंह ने अपने संबोधन में मालदा मंडल के राजभाषा विभाग की इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि राजभाषा हिंदी में कार्य करना कठिन नहीं है, बल्कि यह कार्य को अधिक सरल और प्रभावी बनाता है। उन्होंने कर्मचारियों से अपील की कि हिंदी में कार्य को किसी बाध्यता के रूप में नहीं बल्कि स्वेच्छा और गर्व के साथ अपनाएं।

 

कार्यशाला के मुख्य वक्ता श्री रामजन्म मिश्र ने राजभाषा हिंदी के संवैधानिक महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं बल्कि देश की प्रशासनिक व्यवस्था को सुगम बनाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने बताया कि कार्यालयी कामकाज में सरल, स्पष्ट और शुद्ध हिंदी का प्रयोग कार्य की गुणवत्ता और प्रभावशीलता को बढ़ाता है। साथ ही उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं कर्मचारियों को हिंदी के व्यावहारिक उपयोग में आने वाली समस्याओं को दूर करने में काफी मददगार साबित होती हैं।

 

दो दिनों तक चली इस कार्यशाला को प्रतिदिन दो सत्रों में आयोजित किया गया। इसमें प्रतिभागियों को टिप्पणी लेखन, पत्र और पत्राचार लेखन, राजभाषा नियमों एवं अधिनियमों की जानकारी तथा कंप्यूटर पर हिंदी में कार्य करने की विधियों के बारे में विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया।

 

कार्यशाला के दौरान सरकारी कार्यों में हिंदी के प्रभावी उपयोग, भाषा की सरलता, स्पष्टता और शुद्धता पर विशेष जोर दिया गया। मालदा मंडल के राजभाषा विभाग द्वारा आयोजित यह कार्यशाला कर्मचारियों को हिंदी के संवर्धन और आधिकारिक कार्यप्रणाली में इसके प्रभावी उपयोग के लिए प्रेरित करने में अत्यंत सफल रही।

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