हैदराबाद: हिंदू धर्म में सूर्य के राशि परिवर्तन को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. साल 2026 में 14 मार्च, शनिवार से खरमास की शुरुआत होने जा रही है. ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार जब सूर्य देव मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तो इस अवधि को खरमास या मीन संक्रांति कहा जाता है. इस दौरान लगभग एक महीने तक विवाह, मुंडन, जनेऊ, गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्यों को वर्जित माना जाता है.
लखनऊ के ज्योतिषाचार्य डॉ. उमाशंकर मिश्र के अनुसार 14 मार्च 2026 को तड़के 03:07 बजे सूर्य कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में प्रवेश करेंगे. इसी के साथ खरमास की शुरुआत हो जाएगी. यह अवधि 14 अप्रैल, मंगलवार को सुबह 11:25 बजे समाप्त होगी, जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेंगे. सूर्य के इस परिवर्तन को मेष संक्रांति भी कहा जाता है.
वैदिक ज्योतिष के अनुसार किसी भी शुभ कार्य की सफलता के लिए सूर्य, गुरु और शुक्र का मजबूत होना जरूरी माना जाता है. खरमास के दौरान सूर्य गुरु की राशि मीन में रहते हैं, जिससे सूर्य का प्रभाव कमजोर माना जाता है. इसी कारण इस समय किए गए मांगलिक कार्यों के शुभ परिणाम नहीं मिलते. विशेष रूप से विवाह के लिए गुरु और शुक्र का बल आवश्यक माना जाता है, जो इस अवधि में कमजोर रहता है.
हालांकि धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से यह महीना बेहद फलदायी माना जाता है. इस दौरान भगवान विष्णु की पूजा, श्रीहरि का कीर्तन और सूर्य देव को अर्घ्य देना विशेष शुभ माना जाता है. पंडितों के अनुसार इस महीने दान-पुण्य, यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है. मान्यता है कि जो व्यक्ति इस अवधि में संयम और नियम का पालन करता है, उसे मृत्यु के बाद वैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है.
साल 2026 में एक और खास स्थिति देखने को मिलेगी. इस वर्ष ज्येष्ठ मास दो बार आएगा. 2 मई से 29 जून तक ज्येष्ठ मास रहेगा, जिसमें 15 मई से 17 जून तक मलमास यानी अधिक मास का प्रभाव रहेगा. इस वजह से अप्रैल में खरमास समाप्त होने के बाद कुछ समय तक विवाह जैसे मांगलिक कार्य हो सकेंगे, लेकिन मलमास शुरू होते ही फिर से इन पर विराम लग जाएगा.
पंचांग के अनुसार खरमास खत्म होने के बाद अप्रैल से जुलाई के बीच कई शुभ विवाह मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे. इसलिए यदि घर में कोई मांगलिक कार्य की योजना है, तो 14 अप्रैल के बाद की तिथियों का चयन करना अधिक शुभ माना गया है.
