भागलपुर के तिलकामांझी थाना क्षेत्र से जमीन के बड़े सौदे के बाद लापता हुए सत्यप्रकाश साह को पुलिस ने करीब छह महीने बाद उत्तर प्रदेश के वृंदावन से बरामद कर लिया है। इस मामले में जो अपहरण की कहानी सामने आ रही थी, वह अब पूरी तरह झूठी साबित हो गई है। सत्यप्रकाश साह ने खुद कोर्ट में बयान देकर स्पष्ट किया है कि उनका किसी ने अपहरण नहीं किया था।

 

मिली जानकारी के अनुसार, मुंदीचक निवासी डॉक्टर कुंदन साह ने 31 जुलाई 2025 को सत्यप्रकाश साह से केवाला के माध्यम से एक जमीन खरीदी थी। इस जमीन की कुल कीमत 1 करोड़ 28 लाख 16 हजार रुपये तय हुई थी। डॉक्टर कुंदन साह ने यह पूरी राशि एक्सिस बैंक के चेक के माध्यम से सत्यप्रकाश साह को दे दी थी। जमीन की रजिस्ट्री की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई थी, लेकिन इसके बावजूद खरीदार को जमीन का कब्जा नहीं मिल पाया था।

 

इसी बीच अचानक सत्यप्रकाश साह के लापता होने से पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया। शुरुआत में इस घटना को अपहरण से जोड़कर देखा जा रहा था और इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं होने लगी थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए तिलकामांझी थाना पुलिस ने जांच शुरू की और उनकी तलाश तेज कर दी।

 

पुलिस टीम ने तकनीकी अनुसंधान और गुप्त सूचना के आधार पर सत्यप्रकाश साह की लोकेशन उत्तर प्रदेश के वृंदावन में ट्रेस की। इसके बाद पुलिस की एक टीम वहां पहुंची और उन्हें बरामद कर लिया। इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व एसआई शशि भूषण कुमार कर रहे थे।

 

बरामदगी के बाद पुलिस सत्यप्रकाश साह को भागलपुर लेकर आई, जहां उन्हें कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट में दिए गए अपने बयान में सत्यप्रकाश साह ने कहा कि उनका किसी ने अपहरण नहीं किया था। उन्होंने बताया कि वे अपनी पत्नी से परेशान होकर घर छोड़कर वृंदावन के एक आश्रम में रहने चले गए थे।

 

सत्यप्रकाश साह के इस बयान के बाद अपहरण की पूरी कहानी खारिज हो गई है। हालांकि अब पुलिस इस मामले के कानूनी पहलुओं की जांच कर रही है, खासकर जमीन के सौदे और पैसे के लेन-देन को लेकर। फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर इलाके में काफी चर्चा हो रही है।

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