दरभंगा: ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. नंदलाल पासवान इन दिनों आर्थिक तंगी और कथित प्रशासनिक उपेक्षा से जूझ रहे हैं। बकाया वेतन और अन्य भुगतान नहीं मिलने से उनकी स्थिति ऐसी हो गई है कि वे अपनी बेटी की शादी के लिए भी पैसों के मोहताज हैं। अपनी पीड़ा मीडिया के सामने बताते हुए प्रोफेसर भावुक हो गए और फफक-फफक कर रोने लगे।
डॉ. पासवान के मुताबिक, उन्होंने 9 अप्रैल 1986 को एमएलएसएम कॉलेज, दरभंगा में योगदान दिया था और 31 मार्च 2021 को सेवानिवृत्त हुए। यानी करीब 35 वर्षों तक उन्होंने विश्वविद्यालय में सेवा दी। उनका दावा है कि सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न आदेशों और बिहार सरकार के राज्यादेश के तहत उनकी सेवा को वैध और नियमित माना गया था तथा उन्हें लंबे समय तक नियमित वेतन भी मिलता रहा।
हालांकि, प्रोफेसर का आरोप है कि उनके सेवाकाल के कई वर्षों का वेतन अब तक विश्वविद्यालय प्रशासन ने रोक रखा है। उन्होंने बताया कि नवंबर 1986 से नवंबर 1989, मार्च 2008 से अक्टूबर 2008 और मार्च 2009 से नवंबर 2018 तक का वेतन उन्हें नहीं मिला। वहीं नवंबर 2008 से फरवरी 2009 और दिसंबर 2018 से 31 मार्च 2021 तक उन्हें नियमित वेतन मिला।
डॉ. पासवान का कहना है कि बकाया भुगतान को लेकर चांसलर की ओर से आदेश भी जारी किया गया था और पटना लोकभवन से मामले के समाधान की समय-सीमा तय की गई थी। इसके बावजूद कार्रवाई लंबित है। उनका आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बनी समीक्षा समिति की रिपोर्ट 27 मार्च 2021 को विश्वविद्यालय को मिल गई थी, लेकिन उसकी आधिकारिक अधिसूचना अब तक जारी नहीं हुई।
प्रोफेसर 3 अगस्त 2026 से विश्वविद्यालय परिसर में अनिश्चितकालीन धरना और अनशन पर बैठे हैं। उनकी पांच सूत्री मांगों में बकाया वेतन का भुगतान, सरकारी अभिलेखों में कथित हेराफेरी की जांच और जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई शामिल है।
सबसे भावुक करने वाली बात यह है कि डॉ. पासवान को अपनी बेटी की शादी के लिए पैसों की जरूरत है। उनका कहना है कि उन्होंने इसके लिए क्लेम सेल की संचिका संख्या 5759/26 के तहत भुगतान की मांग की है। प्रोफेसर ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, उनका अनशन और धरना जारी रहेगा।





