बिहार के रोहतास जिले के डेहरी-डालमियानगर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी डॉ. विमल कुमार हत्याकांड में पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने कई अहम खुलासे किए हैं। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार उनकी मौत किसी एक चोट से नहीं, बल्कि शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों पर गंभीर चोट और अत्यधिक आंतरिक रक्तस्राव के कारण हुई। रिपोर्ट सिविल सर्जन कार्यालय को सौंप दी गई है।
सिविल सर्जन डॉ. मणिराज रंजन ने बताया कि मृतक के शरीर पर गोली, धारदार हथियार या किसी नुकीली वस्तु के निशान नहीं मिले। हालांकि पूरे शरीर पर भारी और कुंद वस्तु से किए गए हमले के स्पष्ट प्रमाण पाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक सिर पर बेहद गंभीर चोट लगी थी, जिससे अत्यधिक रक्तस्राव हुआ। गर्दन की दोनों प्रमुख हड्डियां टूट गई थीं, जिससे श्वसन तंत्र प्रभावित हुआ और सांस रुकने लगी।
पोस्टमार्टम में यह भी सामने आया कि सीने की कई पसलियां टूट चुकी थीं। लिवर फट गया था, फेफड़ों में गंभीर चोटें थीं और गले का थायराइड क्षेत्र पूरी तरह क्षतिग्रस्त मिला। इन सभी चोटों के कारण शरीर के भीतर भारी रक्तस्राव हुआ और अंततः हृदय ने काम करना बंद कर दिया। मेडिकल रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि हमलावर ने बेहद क्रूरता के साथ हमला किया।
रिपोर्ट सामने आने के बाद जांच और तेज हो गई है। पुलिस अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर घटना की हर कड़ी जोड़कर अन्य संभावित आरोपियों की तलाश में जुटी है। मामले में मृतक के ड्राइवर मिथिलेश कुमार को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस का दावा है कि उसने पूछताछ में हत्या की बात स्वीकार कर ली है।
हालांकि आरोपी की पत्नी आरती कुमारी ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि उनके पति निर्दोष हैं और पुलिस के दबाव में उनसे जुर्म कबूल कराया गया है। उनका आरोप है कि मिथिलेश को साजिश के तहत फंसाया गया है।
इस सनसनीखेज हत्याकांड ने पूरे बिहार में आक्रोश पैदा कर दिया है। नगर परिषद के अधिकारियों, कर्मचारियों और स्थानीय लोगों की नजर अब इस मामले की जांच कर रही एसआईटी पर टिकी है। उम्मीद की जा रही है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर जांच टीम जल्द ही पूरे मामले का खुलासा करेगी। :::





