भारत-बांग्लादेश सीमा पर देश की सुरक्षा में तैनात बिहार के औरंगाबाद जिले के रजपरसा गांव निवासी बीएसएफ जवान जयंत सिंह उर्फ गुड्डू ड्यूटी के दौरान शहीद हो गए। उनकी मौत किशनगंज के पास सीमा क्षेत्र में अचानक हुए वज्रपात की चपेट में आने से हुई। इस दुखद घटना की खबर मिलते ही परिवार, गांव और पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।
जानकारी के अनुसार, जयंत सिंह की ड्यूटी रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक थी। इसी दौरान सीमा क्षेत्र में तेज बारिश और गरज के साथ बिजली चमकी। अचानक हुए वज्रपात की चपेट में आने से वे गंभीर रूप से घायल हो गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। घटना के बाद बीएसएफ के अधिकारियों ने तत्काल आवश्यक कार्रवाई शुरू की। जवान के पार्थिव शरीर को पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले के इस्लामपुर में पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनका पार्थिव शरीर सड़क मार्ग से पटना होते हुए औरंगाबाद जिले के पैतृक गांव रजपरसा के लिए रवाना कर दिया गया। गांव पहुंचने पर पूरे सैन्य सम्मान और राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
परिजनों ने बताया कि ड्यूटी पर जाने से ठीक पहले रात करीब 12 बजे जयंत सिंह ने अपनी पत्नी मीरा सिंह से फोन पर बात की थी। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह उनकी आखिरी बातचीत होगी। बुधवार सुबह करीब 6 बजे बीएसएफ बटालियन की ओर से परिवार को फोन कर पहले तबीयत खराब होने की जानकारी दी गई। बाद में छोटे भाई बंटी कुमार से बातचीत के दौरान जवान की शहादत की आधिकारिक सूचना दी गई।
जयंत सिंह के पिता अर्जुन सिंह होमगार्ड में कार्यरत हैं। बेटे की शहादत पर उन्हें गर्व है, लेकिन जवान बेटे को खोने का दर्द परिवार के लिए असहनीय है। जयंत सिंह अपने पीछे पत्नी मीरा सिंह, 16 वर्षीय बेटे अभिजीत और 15 वर्षीय बेटी मुस्कान को छोड़ गए हैं। दोनों बच्चे औरंगाबाद के एक मिशन स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं।
शहादत की खबर फैलते ही रजपरसा गांव में मातम छा गया। स्थानीय लोग लगातार शहीद के घर पहुंचकर परिजनों को सांत्वना दे रहे हैं। बीएसएफ के साथी जवानों और ग्रामीणों ने जयंत सिंह को एक कर्तव्यनिष्ठ और साहसी सैनिक बताते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। देश की रक्षा करते हुए उनका सर्वोच्च बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा।





