
बिहार के खगड़िया जिले के अलौली प्रखंड कार्यालय में मंगलवार को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (विजिलेंस) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए मनरेगा के कार्यक्रम पदाधिकारी (पीओ) रमन जी भाई और सहायक अकाउंटेंट साहिल अकरम को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई से पूरे प्रखंड कार्यालय में हड़कंप मच गया और कर्मचारियों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि मनरेगा योजना से संबंधित फाइल आगे बढ़ाने और मस्टर रोल क्लियर करने के बदले अधिकारियों ने रिश्वत की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने मामले का सत्यापन कराया। शिकायत सही पाए जाने पर विशेष टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया और मंगलवार को दोनों अधिकारियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ दबोच लिया।
निगरानी टीम के डीएसपी वसीम फिरोज ने बताया कि परिवादी ने शिकायत की थी कि मनरेगा के कार्य का भुगतान नहीं हो रहा था और भुगतान कराने के बदले रिश्वत मांगी जा रही थी। उनके अनुसार, कार्यक्रम पदाधिकारी ने ₹45 हजार और सहायक अकाउंटेंट ने ₹20 हजार की रिश्वत की मांग की थी। कार्रवाई के दौरान दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर आवश्यक दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। अब उनसे पूछताछ की जा रही है और मामले के अन्य पहलुओं की भी जांच चल रही है।
वहीं, अलौली थानाध्यक्ष कृष्ण कुमार ने बताया कि निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम दोनों आरोपितों को अपने साथ ले गई है। उन्होंने कहा कि पूछताछ के आधार पर मामले में आगे और भी खुलासे हो सकते हैं। विस्तृत जानकारी निगरानी ब्यूरो द्वारा साझा की जाएगी।
इस कार्रवाई की खबर फैलते ही प्रखंड कार्यालय परिसर में लोगों की भीड़ जुट गई। आम लोगों ने विजिलेंस की कार्रवाई का स्वागत करते हुए इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम बताया। मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना में रिश्वतखोरी का मामला सामने आने से सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए हैं। हालांकि, निगरानी विभाग की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश गया है कि भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।





