बिहार में मदरसों को मिलने वाले सरकारी अनुदान और शिक्षकों के वेतन भुगतान की जांच को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा दिए गए निर्देशों का सहरसा के विधायक इंद्रजीत प्रसाद गुप्ता उर्फ आईपी गुप्ता ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जमीनी स्तर पर व्यापक और निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
विधायक आईपी गुप्ता ने कहा कि सरकार द्वारा मदरसों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता का लाभ वास्तविक शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए प्रखंड स्तर पर विशेष जांच समितियों का गठन किया जाना चाहिए, जो मदरसों का स्थलीय निरीक्षण कर वहां की वास्तविक स्थिति का आकलन करें और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपें।
उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि मदरसों को निर्धारित अनुदान समय पर मिल रहा है या नहीं तथा उसका उपयोग शिक्षा और विद्यार्थियों के हित में किया जा रहा है या नहीं। साथ ही शिक्षकों के वेतन भुगतान, छात्रों की उपस्थिति, पठन-पाठन की स्थिति और शैक्षणिक वातावरण की भी नियमित समीक्षा होनी चाहिए।
आईपी गुप्ता ने कहा कि मदरसे राज्य की शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उन्हें सरकार से मिलने वाली सहायता का सही उपयोग होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जांच का उद्देश्य किसी संस्था को परेशान करना नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना होना चाहिए।
विधायक ने मदरसों की आधारभूत संरचना को और मजबूत बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बेहतर भवन, आधुनिक सुविधाएं, प्रशिक्षित शिक्षक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था उपलब्ध कराकर विद्यार्थियों को बेहतर भविष्य दिया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही बढ़ाने की है, जिसका सभी को समर्थन करना चाहिए। विधायक ने उम्मीद जताई कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और तथ्यात्मक होगी तथा इससे मदरसों की शैक्षणिक व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता और सुधार से ही राज्य का समग्र विकास संभव है।