बिहार के गया जिले से राहत भरी खबर सामने आई है। फतेहपुर थाना क्षेत्र के रंगु नगर गांव में 300 फीट गहरे खुले बोरवेल में गिरे चार वर्षीय मासूम आयुष को करीब 9 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। पूरी रात चले इस अभियान में एनडीआरएफ, पुलिस, प्रशासन और स्थानीय ग्रामीणों ने मिलकर बच्चे की जान बचाई। फिलहाल आयुष स्वस्थ है और अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है।
घटना गुरुवार रात करीब 8 बजे की है। रंगु नगर गांव निवासी दिनेश मांझी का चार वर्षीय बेटा आयुष घर के बाहर खेल रहा था। खेलते-खेलते वह नल-जल योजना के तहत खोदे गए खुले बोरवेल में गिर गया। सूचना मिलते ही पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत प्रशासन को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस, एनडीआरएफ और स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई।
जानकारी के अनुसार, आयुष बोरवेल में करीब 25 फीट की गहराई पर फंस गया था। रेस्क्यू टीम ने सबसे पहले बच्चे तक ऑक्सीजन पहुंचाने की व्यवस्था की, ताकि उसे सांस लेने में कोई परेशानी न हो। इसके बाद जेसीबी मशीन की मदद से बोरवेल के समानांतर गड्ढा खोदने का काम शुरू किया गया। पूरी रात सावधानी के साथ खुदाई और बचाव अभियान चलता रहा।
फतेहपुर की अंचलाधिकारी अमिता सिन्हा और प्रखंड विकास पदाधिकारी शशि भूषण साहू लगातार मौके पर मौजूद रहे और अभियान की निगरानी करते रहे। एनडीआरएफ की टीम ने विशेष तकनीक का इस्तेमाल करते हुए सुबह करीब 3 बजे आयुष को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। बाहर निकलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उसका प्राथमिक उपचार किया और उसे फतेहपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने उसे पूरी तरह स्वस्थ बताया।
बताया गया कि यह बोरवेल नल-जल योजना के तहत खोदा गया था। इसकी कुल गहराई करीब 300 फीट है। शुरुआती 50 फीट तक 12 इंच चौड़ी बोरिंग और उसके बाद लगभग 250 फीट तक 6 इंच की बोरिंग की गई थी। घटना के बाद खुले बोरवेल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि ऐसे सभी खुले बोरवेल को तत्काल बंद कराया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।







