बांकीपुर उपचुनाव में बीजेपी का बड़ा दांव, 48 घंटे में बदला उम्मीदवार; नीरज कुमार सिन्हा को मिला टिकट

पटना: बिहार की चर्चित बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव से पहले बीजेपी ने बड़ा राजनीतिक दांव चलते हुए अपना उम्मीदवार बदल दिया है। पहले घोषित प्रत्याशी अभिषेक कुमार ‘बंटी’ ने पारिवारिक कारणों का हवाला देकर चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया। इसके बाद पार्टी ने महज 48 घंटे के भीतर संगठन से जुड़े युवा कार्यकर्ता नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार घोषित कर दिया। इस फैसले ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

करीब 33 वर्षीय नीरज कुमार सिन्हा लंबे समय से भाजपा संगठन में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने बूथ अध्यक्ष से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की और मंडल महामंत्री, भाजयुमो जिला उपाध्यक्ष तथा दो बार मंडल अध्यक्ष जैसी जिम्मेदारियां निभाईं। पहली बार उन्हें विधानसभा चुनाव लड़ने का मौका मिला है। भाजपा इसे संगठन के समर्पित कार्यकर्ताओं को सम्मान देने की परंपरा बता रही है।

उम्मीदवार बदलने को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं हैं। हालांकि भाजपा और अभिषेक बंटी ने आधिकारिक तौर पर केवल पारिवारिक कारणों का ही उल्लेख किया है। वहीं कुछ राजनीतिक विश्लेषक इसे चुनावी रणनीति और विपक्ष की संभावित घेराबंदी से जोड़कर देख रहे हैं। अभिषेक बंटी के माता-पिता का नाम पहले चर्चित चारा घोटाले से जुड़े मामलों में सामने आ चुका है, लेकिन भाजपा ने उम्मीदवार परिवर्तन को इससे जोड़ने से साफ इनकार किया है।

भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा ने कहा कि पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है और वह संगठन की उम्मीदों पर खरा उतरने का पूरा प्रयास करेंगे। उन्होंने बांकीपुर के विकास को अपनी प्राथमिकता बताया।

वहीं राजद ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि उम्मीदवार बदलना पार्टी की रणनीतिक असमंजस का संकेत है। इसके जवाब में भाजपा ने कहा कि पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से उम्मीदवार तय करती है और परिवारवाद नहीं, बल्कि संगठन के कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाने में विश्वास रखती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बांकीपुर उपचुनाव इस बार बेहद दिलचस्प होगा। भाजपा के सामने अपनी पारंपरिक सीट बचाने की चुनौती है, जबकि जन सुराज के प्रशांत किशोर की मौजूदगी से मुकाबला और भी कड़ा हो गया है। ऐसे में इस सीट का परिणाम बिहार की भविष्य की राजनीतिक दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

Related Posts

भागलपुर में 6 माह की गर्भवती महिला की संदिग्ध मौत, 10 महीने पहले हुई थी शादी; पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

भागलपुर में 6 माह की गर्भवती महिला की संदिग्ध मौत, 10 महीने पहले हुई थी शादी; पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

चलती ट्रेन बनी डिलीवरी रूम: तीन महिला डॉक्टरों ने प्रसूता और नवजात की बचाई जान, पेश की मानवता की मिसाल

चलती ट्रेन बनी डिलीवरी रूम: तीन महिला डॉक्टरों ने प्रसूता और नवजात की बचाई जान, पेश की मानवता की मिसाल

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *