सीतामढ़ी में सिंगल यूज प्लास्टिक अब कचरा नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास का मजबूत माध्यम बन रहा है। जिला प्रशासन और बक्सर की राय इंडस्ट्रीज की साझेदारी से प्लास्टिक कचरे को रिसाइकिल कर मजबूत और आकर्षक बेंच तैयार की जा रही हैं।
इस परियोजना के तहत करीब 40 किलोग्राम सिंगल यूज प्लास्टिक से एक बेंच बनाई जाती है। पहले प्लास्टिक का संग्रह किया जाता है, फिर उसकी सफाई, छंटाई और वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेसिंग कर उसे उपयोगी उत्पाद में बदला जाता है। तैयार बेंचों को सरकारी स्कूलों, पार्कों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर लगाया जा रहा है।
कंपनी के अनुसार, एक बेंच तैयार करने की लागत 10 हजार रुपये है। इसमें से 2 हजार रुपये जिला प्रशासन को मार्जिन मनी के रूप में वापस दिए जाते हैं। इन बेंचों की खासियत है कि इनमें जंग नहीं लगता, धूप और बारिश का असर कम होता है तथा रखरखाव भी आसान है।
यह पहल ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की अवधारणा को साकार कर रही है। प्लास्टिक प्रदूषण कम करने के साथ-साथ लोगों को यह संदेश भी दिया जा रहा है कि सही तकनीक और रिसाइक्लिंग के जरिए कचरे को भी मूल्यवान संसाधन में बदला जा सकता है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि सिंगल यूज प्लास्टिक वर्षों तक नष्ट नहीं होता और धीरे-धीरे माइक्रोप्लास्टिक बनकर मिट्टी, पानी और मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा करता है। इसी वजह से केंद्र सरकार ने 1 जुलाई 2022 से कई सिंगल यूज प्लास्टिक उत्पादों पर प्रतिबंध लगाया है। नियमों के उल्लंघन पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत पांच वर्ष तक की सजा और एक लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।
प्रशासन लोगों से अपील कर रहा है कि वे प्लास्टिक कचरे को खुले में फेंकने के बजाय संग्रह केंद्रों तक पहुंचाएं, ताकि उसका पुनर्चक्रण किया जा सके। इस अभियान से पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। यदि यह मॉडल अन्य जिलों में भी अपनाया जाए तो प्लास्टिक प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के साथ स्वच्छ भारत मिशन को नई दिशा मिल सकती है।







