मुंगेर के एक छोटे से गांव से निकला एक युवा आज पूरी दुनिया में अपनी पहचान बना चुका है. बिहार के असरगंज प्रखंड के मकवा गांव के रहने वाले ट्रैवल व्लॉगर नोमैड शुभम कुमार पंजियारा ने महज 24 साल की उम्र में दुनिया के सभी 197 संप्रभु देशों की यात्रा पूरी करने का दावा किया है. ब्राजील पहुंचते ही उनका 10 साल लंबा विश्व भ्रमण पूरा हुआ.
शुभम ने सोशल मीडिया पर लिखा, “197वां देश पूरा हो गया, मेरा आखिरी देश ब्राजील है. पहली हिचहाइक से आखिरी हिचहाइक तक 10 साल, 197 देश.” उन्होंने बताया कि उनकी यात्रा नेपाल से शुरू हुई और रूस, चीन, थाईलैंड, लाओस समेत दुनिया के हर कोने तक पहुंची. रूस में उन्होंने करीब 3,000 किलोमीटर हिचहाइकिंग कर सफर तय किया.
साधारण परिवार से आने वाले शुभम के पिता सेवानिवृत्त प्राचार्य सतीश कुमार सत्य और मां गौरी देवी गृहिणी हैं. परिवार चाहता था कि वह पढ़-लिखकर बड़ी नौकरी करें, लेकिन शुभम ने दुनिया घूमने का सपना चुना. परिवार से IAS की तैयारी का बहाना बनाकर वह दिल्ली की जगह मलेशिया पहुंच गए और वहीं से उनकी अंतरराष्ट्रीय यात्रा शुरू हुई.
कम बजट में यात्रा करना उनकी सबसे बड़ी पहचान रही. कई वर्षों तक उन्होंने 10 से 12 हजार रुपये मासिक और कई देशों में करीब 500 रुपये प्रतिदिन के खर्च पर हिचहाइकिंग, लोकल ट्रांसपोर्ट, काउचसर्फिंग और स्थानीय लोगों की मेहमाननवाजी के सहारे सफर जारी रखा. इस दौरान उनके छह पासपोर्ट भर गए और वीजा व इमिग्रेशन जैसी कई चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा.
शुभम ने अपनी यात्राओं को यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर साझा किया, जिससे उन्हें लाखों दर्शकों का साथ मिला और सोशल मीडिया से होने वाली आय ने आगे की यात्राओं में मदद की. उनके पिता, मां और बहन ने इस उपलब्धि पर गर्व जताया है.
हालांकि, गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स जैसी संस्थाओं की ओर से “सबसे कम उम्र में सभी देशों की यात्रा” संबंधी आधिकारिक पुष्टि अभी लंबित है. दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद ही इस उपलब्धि का औपचारिक सत्यापन होगा. फिलहाल, मुंगेर का यह युवा अपनी प्रेरक यात्रा से लाखों लोगों के लिए मिसाल बन चुका है।






