बिहार के गया से निकलकर टीवी और फिल्मों में अपनी अलग पहचान बनाने वाले अभिनेता राजेश कुमार आज भी अपनी मिट्टी से गहराई से जुड़े हुए हैं। पटना में ईटीवी भारत से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि अभिनय के साथ-साथ खेती अब उनके जीवन का अहम हिस्सा बन चुकी है।
राजेश कुमार ने बताया कि उनकी दोनों बहनें विदेश की नौकरी छोड़कर गांव लौट आई हैं। एक अमेरिका और दूसरी फिनलैंड की नागरिक हैं, लेकिन अब सभी भाई-बहन मिलकर गया के गुरुआ क्षेत्र में प्राकृतिक खेती से जुड़े प्रोजेक्ट चला रहे हैं। उनका लक्ष्य किसानों के लिए एक सफल और टिकाऊ खेती का मॉडल तैयार करना है।
उन्होंने स्वीकार किया कि शुरुआत में उन्हें भारी नुकसान झेलना पड़ा। महाराष्ट्र और बिहार में सहजन की खेती का प्रयोग सफल नहीं रहा, लेकिन इन अनुभवों से उन्होंने सीखा कि खेती में बाजार और सही योजना सबसे ज्यादा जरूरी है।
राजेश ने कहा कि उनकी पत्नी और पूरा परिवार हर कदम पर उनके साथ खड़ा रहा। उनका मानना है कि आने वाले दो-तीन वर्षों में उनका कृषि मॉडल छोटे किसानों के लिए नई संभावनाएं खोलेगा।
सब्जी बेचने की वायरल तस्वीरों पर उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि यह आर्थिक मजबूरी नहीं थी, बल्कि लोगों को प्राकृतिक खेती और किसानों के सम्मान का संदेश देने की एक कोशिश थी। उन्होंने कहा कि “धनिया मुफ्त मांगने से पहले किसानों की मेहनत जरूर याद रखनी चाहिए।”
अभिनय करियर पर बात करते हुए राजेश ने बताया कि 2017 से 2022 तक ब्रेक लेने के बाद उन्होंने फिल्मों और ओटीटी पर दमदार वापसी की। अब वे कई बड़े प्रोजेक्ट्स में नजर आ रहे हैं, जिनमें वरुण धवन के साथ फिल्म “है जवानी तो इश्क होना है”, एक नई फिल्म और वेब सीरीज “रक्तांचल-3” शामिल हैं।
छठ पर्व को उन्होंने जीवन जीने का तरीका बताया और कहा कि इस साल वह गया में छठ करेंगे। वहीं राजनीति में आने के सवाल पर राजेश कुमार ने कहा कि अगर मौका मिला तो वह लोकसभा या विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए मानसिक रूप से पूरी तरह तैयार हैं। उनका मानना है कि विजन और समाज के लिए काम करने की इच्छा रखने वाले लोगों को राजनीति में जरूर आना चाहिए।








