बिहार की उच्च शिक्षा में बड़े बदलाव: नया विश्वविद्यालय कानून बनेगा, ट्रांसफर नियम तय, 30 सितंबर तक लंबित डिग्रियां जारी करने का निर्देश

पटना: बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधारों की दिशा में शुक्रवार को अहम फैसला लिया गया। लोक भवन में राज्यपाल-सह-कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर और वरिष्ठ अधिकारियों ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। बैठक में शोध, डिजिटल प्रशासन, विश्वविद्यालयों के नए कानून और शिक्षकों के स्थानांतरण जैसे मुद्दों पर सहमति बनी।

बैठक में तय किया गया कि 30 सितंबर 2026 तक सभी लंबित डिग्रियां जारी की जाएंगी। साथ ही बिहार के विश्वविद्यालयों के लिए दूसरे राज्यों और केंद्रीय विश्वविद्यालयों की श्रेष्ठ व्यवस्थाओं पर आधारित नया अधिनियम तैयार किया जाएगा, जिससे उच्च शिक्षा का नियामकीय ढांचा अधिक पारदर्शी और आधुनिक बन सके।

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राज्यपाल ने सभी विश्वविद्यालयों को 31 दिसंबर 2026 तक समर्थ पोर्टल के सभी 26 मॉड्यूल पूरी तरह लागू करने का निर्देश दिया। इसके तहत लेखा, वित्त, कर्मचारी सेवाएं और अकादमिक व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल होगी। बैठक में नवसृजित 211 राजकीय डिग्री महाविद्यालयों के लिए संविदा आधारित सहायक प्राध्यापकों की केंद्रीकृत नियुक्ति प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई।

शोध को बढ़ावा देने के लिए कुलाधिपति पोस्ट-डॉक्टोरल फेलोशिप, मुख्यमंत्री शोध अनुदान योजना और मुख्यमंत्री शोध छात्रवृत्ति योजना शुरू करने पर सहमति बनी। वहीं, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप स्नातकोत्तर के 43 विषयों के नए पाठ्यक्रमों को जुलाई के पहले सप्ताह तक मंजूरी देने की बात कही गई।

प्रशासनिक व्यवस्था को अनुशासित बनाने के लिए शिक्षकों और कर्मचारियों के स्थानांतरण संबंधी नए नियम भी तय किए गए। अब सामान्य स्थानांतरण केवल जून माह में होंगे, जबकि अन्य महीनों में सिर्फ अत्यंत आवश्यक मामलों में कुलाधिपति की पूर्व स्वीकृति से ही तबादला किया जा सकेगा। इसके अलावा शिक्षकों की पदोन्नति के लिए भी समय-सीमा निर्धारित करने का निर्णय लिया गया।

बैठक में शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए आधुनिक कुलाधिपति पुस्तकालय स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा गया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उच्च शिक्षा में सुधार के लिए राज्यपाल की पहल की सराहना करते हुए कहा कि इन फैसलों से बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण और छात्र-केंद्रित बनेगी।

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