मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित हुए दिशोम गुरु शिबू सोरेन, झामुमो कार्यालय में जश्न; भारत रत्न देने की उठी मांग

धनबाद: झारखंड आंदोलन के महानायक और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक शिबू सोरेन को भारत सरकार द्वारा मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान दिए जाने पर धनबाद में खुशी का माहौल देखने को मिला। इस उपलब्धि पर झामुमो जिला कार्यालय में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मिठाइयां बांटकर जश्न मनाया तथा इसे झारखंड के संघर्षों और आदिवासी-मूलवासी समाज के सम्मान का क्षण बताया।

 

जानकारी के अनुसार, नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य समारोह में भारत की राष्ट्रपति द्वारा यह सम्मान दिशोम गुरु की पत्नी को प्रदान किया गया। सम्मान की घोषणा और समारोह के बाद झामुमो कार्यकर्ताओं में उत्साह की लहर दौड़ गई। धनबाद जिला कार्यालय में नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को बधाई देते हुए शिबू सोरेन के योगदान को याद किया।

 

इस अवसर पर झामुमो जिला सचिव मन्नू आलम ने कहा कि शिबू सोरेन का पूरा जीवन जल, जंगल और जमीन की रक्षा तथा आदिवासी, दलित, पिछड़े और वंचित वर्गों के अधिकारों की लड़ाई के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि पद्म भूषण सम्मान उनके लंबे संघर्ष, त्याग और जनसेवा को मिली राष्ट्रीय पहचान है।

 

मन्नू आलम ने यह भी कहा कि झारखंड राज्य के निर्माण, आदिवासी अस्मिता की रक्षा और सामाजिक न्याय की लड़ाई में शिबू सोरेन की भूमिका ऐतिहासिक रही है। ऐसे में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से भी सम्मानित किया जाना चाहिए।

 

वहीं झामुमो जिला उपाध्यक्ष मुकेश सिंह ने कहा कि शिबू सोरेन केवल एक राजनीतिक नेता नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाओं, संघर्षों और उम्मीदों के प्रतीक थे। उन्होंने दशकों तक आदिवासियों, मजदूरों और वंचित समाज की आवाज बनकर काम किया। झारखंड आंदोलन को नई दिशा देने और अलग राज्य के निर्माण में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।

 

झामुमो नेताओं ने कहा कि पद्म भूषण सम्मान पूरे झारखंड के लिए गौरव का विषय है और इससे आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरणा मिलेगी।

संवाददाता : धनबाद ब्यूरो

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