गया जिले का ऐतिहासिक ईश्वरपुर गांव एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। गांव के प्रख्यात ध्रुपद गायक पंडित कृष्ण मोहन पाठक का चयन संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 2025 के लिए किया गया है। देश का यह प्रतिष्ठित सम्मान उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों प्रदान किया जाएगा। इस उपलब्धि से पूरे गांव और क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
ईश्वरपुर को ‘म्यूजिशियन्स विलेज’ के नाम से जाना जाता है। करीब 300 घरों वाले इस गांव में लगभग हर परिवार किसी न किसी रूप में शास्त्रीय संगीत से जुड़ा हुआ है। यहां ध्रुपद, धमार, तबला, हारमोनियम, तानपुरा और ख्याल गायकी की समृद्ध परंपरा आज भी जीवित है। पंडित कृष्ण मोहन पाठक इसी गौरवशाली संगीत परंपरा की चौथी पीढ़ी के प्रतिनिधि हैं।
पंडित पाठक ने कहा कि यह सम्मान केवल उनके लिए नहीं, बल्कि पूरे गांव और संगीत जगत के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय अपने पिता, दादा और परदादा से मिली संगीत विरासत तथा निरंतर अभ्यास को दिया। उन्होंने देश-विदेश के कई प्रतिष्ठित मंचों पर ध्रुपद गायन प्रस्तुत कर अपनी पहचान बनाई है।
ईश्वरपुर गांव का इतिहास भी बेहद रोचक है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, 17वीं शताब्दी में राजस्थान से आए संगीतज्ञ गौड़ ब्राह्मणों ने अपनी संगीत साधना से टिकारी महाराज के बेकाबू हाथी को शांत कर दिया था। उनकी कला से प्रभावित होकर महाराज ने उन्हें सैकड़ों एकड़ भूमि दान में दी, जिस पर बाद में ईश्वरपुर गांव बसा।
ग्रामीणों का दावा है कि गांव के लोग संगीत सम्राट तानसेन की परंपरा से जुड़े हैं। यही कारण है कि यहां बच्चों को बचपन से ही संगीत का प्रशिक्षण दिया जाता है। आज इस गांव के कलाकार भारत ही नहीं, बल्कि अमेरिका, कनाडा, थाईलैंड और मॉरीशस जैसे देशों में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।
ध्रुपद गायन की प्राचीन परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले पंडित कृष्ण मोहन पाठक का यह सम्मान न केवल ईश्वरपुर, बल्कि पूरे बिहार के लिए गौरव का विषय बन गया है।






