बिहार सरकार लगातार बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था का दावा कर रही है, लेकिन सहरसा जिले से सामने आई एक तस्वीर ने इन दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जिले के सौरबाजार प्रखंड क्षेत्र में एक गर्भवती महिला को प्रसव के लिए ठेले पर अस्पताल ले जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह दृश्य स्वास्थ्य सुविधाओं की जमीनी हकीकत को उजागर करता नजर आ रहा है।
सरकार द्वारा मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध कराई गई है, ताकि आपात स्थिति में लोगों को समय पर इलाज मिल सके। इसके बावजूद एक गर्भवती महिला को ठेले पर स्वास्थ्य केंद्र ले जाया जाना कई गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है। वायरल वीडियो में महिला के परिजन उसे प्रसव के लिए अस्पताल ले जाते दिखाई दे रहे हैं। इसी दौरान कुछ लोगों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर दिया, जो अब चर्चा का विषय बन गया है।
गौरतलब है कि 11 जून 2026 को बिहार विधान परिषद के सदस्य बनने के बाद स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने राज्य के सभी सिविल सर्जनों को स्वास्थ्य व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने का निर्देश दिया था। उन्होंने कहा था कि मरीजों और उनके परिजनों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए तथा अस्पतालों में व्याप्त अनियमितताओं और भ्रष्टाचार पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी चेतावनी दी थी कि यदि दो सप्ताह के भीतर व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो वह स्वयं अस्पतालों का औचक निरीक्षण करेंगे।
हालांकि सहरसा से सामने आई यह तस्वीर स्वास्थ्य विभाग के दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को उजागर करती है। वीडियो में जब परिजनों से एम्बुलेंस की सुविधा नहीं मिलने का कारण पूछा गया तो उन्होंने बताया कि जानकारी के अभाव में वे इस सरकारी सुविधा का लाभ नहीं ले सके।
अब यह मामला स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली, जागरूकता अभियान और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर कई सवाल खड़े कर रहा है। लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रशासन को ठोस कदम उठाने होंगे।






