पटना: पूर्वी चंपारण के मोतिहारी स्थित मोतीझील नहर पर अतिक्रमण के मामले में पटना हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने मोतिहारी नगर निगम को छह सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई भी छह सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।
यह मामला भारतीय न्यायप्रिय नागरिक परिषद द्वारा दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। इससे पहले हाईकोर्ट ने पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया था और मोतिहारी नगर निगम को भी पक्षकार बनाया था।
याचिका में कहा गया है कि मोतिहारी शहर की जीवनरेखा मानी जाने वाली मोतीझील को बूढ़ी गंडक नदी के रामरेखा घाट सिमरा से जोड़ने वाली ब्रिटिशकालीन नहर पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हो चुका है। लगभग 11 किलोमीटर लंबी इस नहर के दोनों किनारों पर अतिक्रमण होने से इसके अस्तित्व और उपयोगिता पर खतरा मंडरा रहा है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विकास कुमार पंकज ने अदालत को बताया कि यह नहर न केवल मोतिहारी शहर को पेयजल उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, बल्कि बाढ़ के दौरान अतिरिक्त पानी की निकासी कर शहर को सुरक्षित रखने का भी काम करती है। उन्होंने कहा कि नहर मोतीझील को रिचार्ज करने का एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक स्रोत भी है।
अदालत को यह भी बताया गया कि 24 दिसंबर 2022 को तिरहुत कैनाल डिवीजन, मोतिहारी के कार्यपालक अभियंता ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर इस नहर को बाढ़ प्रबंधन और जल संरक्षण के लिए अत्यंत उपयोगी बताया था। इसके बाद जिलाधिकारी ने जांच के लिए एक समिति गठित कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया था।
हालांकि, कई बैठकों के बावजूद अब तक कोई अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है। याचिकाकर्ता ने कहा कि प्रशासनिक देरी के कारण शहरवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद होगी, जिसमें नगर निगम और प्रशासन को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।






