पटना : देश के प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी IIT में प्रवेश की पारंपरिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब केवल जेईई एडवांस्ड के अंकों के आधार पर ही नहीं, बल्कि खेल, कला, संस्कृति, अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड और रिसर्च के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को भी प्रवेश के नए अवसर मिल रहे हैं। इसके साथ ही कई IIT ने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नए और उभरते क्षेत्रों से जुड़े पाठ्यक्रम भी शुरू किए हैं।
अब तक IIT में प्रवेश का सबसे प्रमुख माध्यम जेईई एडवांस्ड परीक्षा रही है, लेकिन नई व्यवस्था के तहत विविध प्रतिभाओं को तकनीकी शिक्षा से जोड़ने की पहल की गई है। हालांकि अधिकांश संस्थानों में जेईई एडवांस्ड की पात्रता और न्यूनतम अर्हता अंक प्राप्त करना अभी भी अनिवार्य रहेगा।
खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए IIT मद्रास, IIT इंदौर, IIT खड़गपुर, IIT मंडी और IIT रुड़की जैसे संस्थानों ने स्पोर्ट्स कोटा की शुरुआत की है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को इसका लाभ मिलेगा।
वहीं, अंतरराष्ट्रीय विज्ञान और गणित ओलंपियाड में भाग लेने वाले छात्रों के लिए भी विशेष प्रवेश व्यवस्था बनाई गई है। IIT खड़गपुर, IIT मद्रास, IIT मंडी, IIT बॉम्बे, IIT गांधीनगर और IIT कानपुर ने ऐसे विद्यार्थियों के लिए विशेष सीटों का प्रावधान किया है। IIT कानपुर अलग स्क्रीनिंग प्रक्रिया के माध्यम से बीटेक और बीएस पाठ्यक्रमों में प्रवेश देगा।
कला और संस्कृति के क्षेत्र में उपलब्धि हासिल करने वाले छात्रों के लिए भी नई संभावनाएं खुली हैं। संगीत, नृत्य, रंगमंच और फाइन आर्ट्स जैसे क्षेत्रों में राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले विद्यार्थियों को IIT मद्रास और IIT मंडी में विशेष कोटे के तहत अवसर मिलेगा।
इसके अलावा IIT कानपुर ने साइबर सिक्योरिटी में नया बीटेक कार्यक्रम शुरू किया है। रिसर्च और डिजाइन में रुचि रखने वाले छात्रों के लिए भी नए विकल्प उपलब्ध हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल उच्च शिक्षा को अधिक समावेशी और प्रतिभा-केंद्रित बनाएगी तथा बहुआयामी प्रतिभाओं को देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों तक पहुंचने का अवसर देगी।






