पटना: डिजिटल दौर, करियर का दबाव, सोशल मीडिया की बढ़ती पकड़ और रिश्तों की जटिलताओं के बीच छात्राओं में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इसी चुनौती से निपटने के लिए पटना समेत बिहार के कई महिला कॉलेजों में काउंसलिंग सेंटर स्थापित किए गए हैं, जहां छात्राएं अपनी समस्याएं साझा कर मानसिक सहयोग प्राप्त कर रही हैं।
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार करियर की चिंता, पढ़ाई का तनाव, रिलेशनशिप इश्यू, बॉडी इमेज को लेकर असुरक्षा, सोशल मीडिया का दबाव और एंगर मैनेजमेंट जैसी समस्याएं छात्राओं में अवसाद का प्रमुख कारण बन रही हैं। कई छात्राएं बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर बड़े शहरों में पढ़ाई करने आती हैं, लेकिन अपेक्षाओं और प्रतिस्पर्धा के दबाव में मानसिक तनाव का शिकार हो जाती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया ने युवाओं के जीवन पर गहरा प्रभाव डाला है। लाइक, व्यूज और ऑनलाइन पहचान की दौड़ में कई छात्राएं खुद की तुलना दूसरों से करने लगती हैं, जिससे आत्मविश्वास में कमी और तनाव बढ़ता है। वहीं, ऑनलाइन गेमिंग और डिजिटल दुनिया में अत्यधिक समय बिताना भी मानसिक स्वास्थ्य के लिए चुनौती बनता जा रहा है।
मनोवैज्ञानिक डॉ. ईशा सिंह बताती हैं कि उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे लगभग सात में से एक छात्र अवसाद से प्रभावित है। छोटे शहरों और गांवों से आने वाले कई छात्र-छात्राएं बड़े शहरों के माहौल में खुद को दूसरों से कम आंकने लगते हैं, जिससे उनमें हीन भावना और तनाव पैदा होता है। समय पर काउंसलिंग मिलने से ऐसे मामलों में सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं।
डॉ. वृंदा सिंह के अनुसार काउंसलिंग सेंटरों में आने वाले अधिकांश मामले करियर, सोशल मीडिया, पढ़ाई के दबाव और रिश्तों से जुड़े होते हैं। ग्रुप और वन-टू-वन काउंसलिंग के माध्यम से छात्राओं को अपनी बात खुलकर रखने का अवसर मिलता है, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे समस्याओं का बेहतर तरीके से सामना कर पाती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि कॉलेजों में काउंसलिंग सेवाओं का विस्तार समय की जरूरत है। सही मार्गदर्शन और मानसिक सहयोग से छात्राओं को अवसाद और तनाव से बाहर निकालकर उन्हें बेहतर भविष्य की ओर बढ़ने में मदद मिल सकती है।