कहावत है कि बूंद-बूंद से सागर भरता है, लेकिन 10 रुपये के एक कैरी बैग ने ऐसा विवाद खड़ा किया कि मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंच गया। आखिरकार यह छोटी-सी रकम मशहूर फुटवियर ब्रांड रेड टेप पर भारी पड़ गई और कंपनी को ग्राहक को कुल 8 हजार रुपये का मुआवजा देने का आदेश मिला।
मामला 1 अप्रैल 2023 का है। एक युवक रेड टेप के शोरूम से जूते खरीदने पहुंचा। उसने जूते पसंद किए, ट्रायल किया और भुगतान कर दिया। लेकिन बिल देखने पर उसे पता चला कि उसमें 10 रुपये कैरी बैग के भी जोड़े गए हैं। ग्राहक ने आपत्ति जताते हुए कहा कि हजारों रुपये के जूते खरीदने के बाद सामान ले जाने के लिए बैग मुफ्त मिलना चाहिए। हालांकि स्टोर कर्मचारियों ने इसे कंपनी की नीति बताते हुए बैग का शुल्क हटाने से इनकार कर दिया।
ग्राहक ने इसे केवल 10 रुपये का मामला नहीं, बल्कि उपभोक्ता अधिकारों का मुद्दा मानते हुए उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान कंपनी ने दलील दी कि कैरी बैग का शुल्क पर्यावरण संरक्षण और ग्राहकों को अपना बैग लाने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लिया जाता है। कंपनी का कहना था कि कोई भी ग्राहक अपना बैग साथ ला सकता है और कैरी बैग खरीदना अनिवार्य नहीं है।
वहीं, ग्राहक पक्ष ने तर्क दिया कि किसी भी उत्पाद को सुरक्षित और डिलीवरी योग्य स्थिति में ग्राहक को सौंपना विक्रेता की जिम्मेदारी है। ऐसे में खरीदे गए सामान को ले जाने के लिए अलग से शुल्क लेना अनुचित व्यापार व्यवहार और सेवा में कमी माना जाना चाहिए।
करीब तीन साल तक चली सुनवाई के बाद उपभोक्ता आयोग ने ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाया। आयोग ने 10 रुपये वापस करने के साथ 4 हजार रुपये मानसिक प्रताड़ना एवं सेवा में कमी के लिए तथा 4 हजार रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में देने का आदेश दिया। इस तरह कंपनी को कुल 8 हजार रुपये का भुगतान करना होगा।
यह फैसला कारोबारियों के लिए स्पष्ट संदेश है कि छोटी रकम को हल्के में लेना महंगा पड़ सकता है। वहीं, यह उपभोक्ताओं को भी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा देता है।
संवाददाता : रजनीश कुमार





