दिन में बच्चों को पढ़ाना और पर्दे के पीछे अंतरराज्यीय हथियार तस्करी के नेटवर्क को संचालित करना। मुंगेर के कथित हथियार तस्कर सीत कुमार राम का यह दोहरा चेहरा उस समय सामने आया, जब पश्चिम बंगाल एसटीएफ की टीम ने भागलपुर में छापेमारी कर उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए भागलपुर के भीखनपुर इलाके में प्राइवेट शिक्षक बनकर रह रहा था। गिरफ्तारी के बाद अदालत ने बंगाल एसटीएफ को 48 घंटे की ट्रांजिट रिमांड दे दी है।
**भीखनपुर में गुप्त ठिकाने पर एसटीएफ की छापेमारी**
जानकारी के मुताबिक, बंगाल एसटीएफ के सब-इंस्पेक्टर नदीम अहमद के नेतृत्व में टीम ने स्थानीय पुलिस की मदद से इशाकचक थाना क्षेत्र के भीखनपुर स्थित आरोपी के गुप्त ठिकाने पर छापेमारी की। इस दौरान सीत कुमार राम को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को भागलपुर के सीजेएम राज कपूर की अदालत में पेश किया गया। अदालत से 48 घंटे की ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद एसटीएफ उसे पश्चिम बंगाल लेकर रवाना हो गई। वहां उसे उत्तर 24 परगना के बारासात (नॉर्थ) न्यायालय में पेश किया जाएगा। बताया जा रहा है कि आरोपी के खिलाफ डेगंगा थाने में दर्ज कांड संख्या 552/2024 में गैर-जमानती वारंट जारी था।
**मालदा में गिरफ्तारी के बाद खुला था नेटवर्क का राज**
इस पूरे हथियार तस्करी नेटवर्क का खुलासा 15 सितंबर 2024 को हुआ था। उस समय बंगाल एसटीएफ ने मालदा निवासी अब्दुल हन्नान को अत्याधुनिक हथियारों के साथ गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान हन्नान ने कथित तौर पर बताया था कि मुंगेर से आने वाले हथियारों की खेप भागलपुर में सीत कुमार राम के माध्यम से उसे मिलती थी। इसके बाद से ही एसटीएफ सीत की तलाश में जुटी हुई थी।
**व्हाट्सएप कॉल और गुप्त कोड से होती थी बातचीत**
जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार, आरोपी पुलिस और जांच एजेंसियों की निगरानी से बचने के लिए सामान्य मोबाइल कॉल के बजाय व्हाट्सएप कॉल का इस्तेमाल करता था। हथियारों की डील और डिलीवरी से जुड़ी बातचीत कथित तौर पर गुप्त कोड के जरिए की जाती थी। आरोप है कि सीत मुंगेर से ऑटोमैटिक पिस्टल, कार्बाइन और कारतूस जुटाकर भागलपुर लाता था और यहां से बंगाल के तस्करों तक पहुंचाता था। इसके बाद हथियारों की सप्लाई पश्चिम बंगाल के अलग-अलग इलाकों में की जाती थी।
फिलहाल आरोपी की गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ उससे पूछताछ कर हथियार तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और पूरे गिरोह के संबंध में जानकारी जुटाएगी। जांच एजेंसियों की पड़ताल के बाद इस अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े कई अन्य नाम सामने आने की संभावना है।





