सहरसा: बिहार के सहरसा में संत बाबा कारू खिरहर संग्रहालय को मत्स्यगंधा पर्यटन स्थल में जगह नहीं मिलने को लेकर विरोध शुरू हो गया है। संग्रहालय को अस्पताल परिसर में स्थानांतरित करने की योजना पर संत बाबा कारू खिरहर विकास परिषद और अखिल भारतीय भगैत महासंघ ने नाराजगी जताई है। संगठन ने जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से संग्रहालय को मत्स्यगंधा पर्यटन स्थल में ही स्थापित करने की मांग की है।
दरअसल, संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष देव नारायण उर्फ नुनु यादव ने कहा कि कोसी क्षेत्र के लोकदेवताओं और संत-महापुरुषों की लगातार उपेक्षा हो रही है। उन्होंने कारू बाबा, बेनी बाबा, दीना-भद्री, लोरिक और मीरा साहब समेत कई लोकदेवताओं की लोकगाथाओं और विरासत को उचित सम्मान देने की मांग की।
नुनु यादव ने सवाल उठाया कि जब मत्स्यगंधा पर्यटन स्थल पर करोड़ों रुपये की लागत से ग्लास ब्रिज का निर्माण कराया जा रहा है, तो संत बाबा कारू खिरहर संग्रहालय को वहां जगह क्यों नहीं दी जा रही है? उन्होंने बताया कि वर्ष 1990 के दशक से संग्रहालय के विकास की पहल होती रही है, लेकिन अब तक इसका समुचित विकास नहीं हो सका। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भी निर्माण के लिए प्रयास हुए, लेकिन मामला लंबित रह गया।
उन्होंने महपुरा स्थित कारू बाबा मंदिर में न्यास बोर्ड की व्यवस्था और वित्तीय अनियमितता की आशंका पर भी जांच कराने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि मांग पूरी नहीं हुई तो 5 से 7 लाख लोकगाथा प्रेमियों के साथ आंदोलन किया जाएगा।
वहीं, संग्रहालय में कार्यरत परिचारी नासिर आलम ने भी अस्पताल परिसर में संग्रहालय रखे जाने का विरोध किया। उनका कहना है कि वहां न तो रहने की समुचित व्यवस्था है और न ही विकास की सुविधाएं। मत्स्यगंधा में संग्रहालय बनने से पर्यटकों की आवाजाही बढ़ती और सरकार को राजस्व भी मिलता।
दस दिनों में शुरू होगा निर्माण कार्य
इधर, कला एवं संस्कृति पदाधिकारी स्नेहा झा ने बताया कि संग्रहालय के लिए जमीन पहले ही आवंटित की जा चुकी है और लगभग दस दिनों के भीतर निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है। उन्होंने भगैत लोकगाथा से जुड़े कलाकारों के लिए संचालित पेंशन योजना की भी जानकारी दी।
फिलहाल, संग्रहालय को मत्स्यगंधा में स्थापित करने की मांग और विभाग की ओर से निर्माण कार्य शुरू कराने के आश्वासन के बीच अब प्रशासन के अगले कदम पर सबकी नजरें टिकी हैं।






