सहरसा। रोजी-रोटी की तलाश में घर से दूर गया एक मजदूर जब वापस लौटा, तो अपने परिवार के लिए खुशियां नहीं, बल्कि जिंदगी भर का दर्द छोड़ गया। जिस घर को संभालने के लिए वह दूसरे राज्य में मेहनत-मजदूरी कर रहा था, उसी घर में गुरुवार की शाम उसका शव पहुंचा। तमिलनाडु से सरकारी एंबुलेंस के जरिए शव सहरसा पहुंचते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। आठ महीने की गर्भवती पत्नी और दो मासूम बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। अब परिजन मौत की निष्पक्ष जांच और सरकारी आर्थिक सहायता की गुहार लगा रहे हैं।
मृतक की पहचान सहरसा नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर 12 स्थित रामफल शाह टोला निवासी सदन मोहन प्रसाद सिंह के 40 वर्षीय पुत्र बबलू सिन्हा के रूप में हुई है। परिवार में उनका 13 वर्षीय बेटा और दो साल की बेटी है। पत्नी मीरा देवी आठ महीने की गर्भवती हैं। परिवार के कमाऊ सदस्य की मौत से उनके सामने अब आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है।
मृतक के चाचा गणेश के मुताबिक, बबलू करीब दो महीने पहले मजदूरी करने तमिलनाडु गए थे। बीते 25 अक्टूबर को वहां की पुलिस ने फोन कर परिजनों को उनकी मौत की सूचना दी। पुलिस की ओर से बताया गया कि मजदूरी के दौरान छत से गिरने के कारण बबलू की मौत हुई है।
हालांकि, मौत की परिस्थितियों को लेकर परिजनों ने संदेह जताया है। उनका कहना है कि घटना की सच्चाई सामने आनी चाहिए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। परिजन चाहते हैं कि मौत के वास्तविक कारणों का स्पष्ट खुलासा हो, ताकि किसी भी तरह का संदेह दूर किया जा सके।
परिजनों ने जिला प्रशासन और सरकार से पीड़ित परिवार को एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की है। उनका कहना है कि बबलू ही परिवार का सहारा थे। उनके जाने से गर्भवती पत्नी और छोटे बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
फिलहाल, परिवार को जांच और सरकारी सहायता का इंतजार है। एक तरफ अपनों को खोने का गम है, तो दूसरी तरफ बच्चों के भविष्य की चिंता। परिजनों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए और संकट की इस घड़ी में परिवार को आर्थिक मदद दी जाए।
लोकेशन: सहरसा, बिहार
संवाददाता: इन्द्रदेव






