जमुई में विकास को नई रफ्तार देने के लिए जिला प्रशासन ने विजन 2030 का खाका पेश किया है। इसके तहत जिले के प्रमुख धार्मिक और प्राकृतिक स्थलों को जोड़कर पर्यटन कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। वहीं, चकाई में लगभग 9000 एकड़ भूमि औद्योगिक हब के लिए चिह्नित की गई है। इन योजनाओं से पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने का लक्ष्य है। शुक्रवार को समाहरणालय के संवाद कक्ष में मीडिया और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई।
जिला जनसंपर्क कार्यालय के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला का विषय था, ‘मीडिया एवं प्रशासन: विश्वास के साझेदार, विकास के सहयात्री’। कार्यक्रम में जिलाधिकारी ने पिछले एक वर्ष के दौरान जिले में हुए विकास कार्यों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने विकास योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका की सराहना की।
जिलाधिकारी ने कहा कि कभी नक्सलवाद के प्रभाव में रहने वाला चोरमारा क्षेत्र आज लोकतांत्रिक भागीदारी और शांतिपूर्ण चुनाव के लिए उदाहरण बन रहा है। उन्होंने भीमबांध को इको टूरिज्म के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना भी साझा की।
पर्यटन विकास के तहत गिद्धेश्वर वन्य क्षेत्र, गिद्धेश्वर मंदिर, नौलखा गढ़, परासी पहाड़, गरही डैम, लछुआर, कुंडघाट और महादेव सिमरिया को जोड़कर पर्यटन कॉरिडोर बनाने की योजना है। परासी पहाड़ और गरही डैम के आसपास रिसॉर्ट, पार्क और पर्यटकों के लिए अन्य सुविधाएं विकसित करने की भी तैयारी है। इसके अलावा झाझा के कुम्हैनी डैम, श्रीकृष्ण सिंह स्टेडियम और खेल भवन के जीर्णोद्धार की योजना पर काम चल रहा है।
औद्योगिक विकास के क्षेत्र में चकाई में करीब 9000 एकड़ भूमि चिह्नित की गई है। यहां औद्योगिक हब विकसित करने की योजना है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
कार्यशाला के दौरान पत्रकारों ने शहर में जाम की समस्या, पर्यटन स्थलों की कनेक्टिविटी और स्टेडियम में क्रिकेट के लिए घास वाला मैदान विकसित करने जैसे सुझाव दिए। जिलाधिकारी ने सुझावों पर सकारात्मक पहल का भरोसा दिया।
कार्यक्रम में जिले के वरीय अधिकारियों और प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक एवं सोशल मीडिया के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। अंत में उप विकास आयुक्त ने सभी मीडियाकर्मियों के प्रति आभार व्यक्त किया।






