रोहतास: बिहार के रोहतास जिले में वन विभाग ने वन्यजीवों के अंगों की अवैध तस्करी और बिक्री के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। कैमूर पहाड़ी के जंगलों से प्रतिबंधित वन्यजीव पैंगोलिन के शल्क की तस्करी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए वन विभाग की टीम ने तीन तस्करों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से पैंगोलिन के शल्क बरामद किए गए हैं। यह कार्रवाई रोहतास वन प्रमंडल और वन्य अपराध नियंत्रण ब्यूरो, कोलकाता की संयुक्त टीम ने की।
वन्यजीवों के अंगों की तस्करी की सूचना मिलने के बाद टीम ने तस्करों को पकड़ने के लिए योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप लगाया। इसी दौरान तस्करी के लिए पहुंचे तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान नोखा के गोसाईपुर निवासी सुनील सिंह, बक्सर जिले के रामपुर निवासी संजय कुमार और कैमूर जिले के बेलाव निवासी विमल पासवान के रूप में हुई है।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। पूछताछ के जरिए वन्यजीवों के अंगों की तस्करी से जुड़े नेटवर्क और उनके संपर्कों की जानकारी जुटाने की कोशिश की जा रही है। डीएफओ स्टालिन फिडल कुमार ने बताया कि पैंगोलिन के शल्क का कोई वैज्ञानिक उपयोग नहीं है, लेकिन अंधविश्वास और कथित जादू-टोने से जुड़ी मान्यताओं के कारण इसकी मांग की जाती है।
इसी अभियान के तहत वन विभाग ने सासाराम के नगर थाना क्षेत्र स्थित धर्मशाला रोड में भी कार्रवाई की। यहां जड़ी-बूटी के नाम पर वन्यजीवों से जुड़ी प्रतिबंधित वस्तुओं की बिक्री करने वाले एक दुकानदार को गिरफ्तार किया गया। दुकान पर छापेमारी के दौरान मॉनिटर लिजार्ड यानी बड़ी छिपकली के हाथा-जोड़ी के 15 पीस, पांच पंजे और बिल्ली से संबंधित पांच खेड़ी बरामद की गईं।
वन विभाग ने स्पष्ट किया कि संरक्षित वन्यजीवों के अंगों की खरीद-बिक्री, उन्हें रखना या उनसे बनी वस्तुओं का कारोबार कानूनन प्रतिबंधित है। विभाग अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है। अधिकारियों ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण के लिए अभियान आगे भी जारी रहेगा।






