सहरसा स्वास्थ्य विभाग में हाईवोल्टेज ड्रामा, कोऑर्डिनेटर ने सिविल सर्जन पर लगाया थप्पड़ मारने का आरोप

सहरसा कार्यालय में फाइल पर हस्ताक्षर कराने पहुंचे जिला स्वास्थ्य समिति के कोऑर्डिनेटर और सिविल सर्जन के बीच शुक्रवार को विवाद हो गया। मामला इतना बढ़ गया कि कोऑर्डिनेटर समीर कुमार गुप्ता ने सिविल सर्जन डॉ. राजनारायण प्रसाद पर बदसलूकी करने और थप्पड़ मारने की कोशिश करने का गंभीर आरोप लगा दिया। हालांकि, सिविल सर्जन ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है। घटना शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे की बताई जा रही है।

 

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मिली जानकारी के अनुसार, जिला स्वास्थ्य समिति के उर्मिला संस्थान में कार्यरत करीब 110 कर्मचारियों का वेतन लंबित था। अक्टूबर महीने के वेतन भुगतान से संबंधित संचिका पर हस्ताक्षर कराने के लिए समीर कुमार गुप्ता सिविल सर्जन कार्यालय पहुंचे थे। इसी दौरान संचिका और अनुपस्थिति रजिस्टर को लेकर दोनों के बीच बहस शुरू हो गई।

 

समीर कुमार गुप्ता का आरोप है कि वे जिले के सभी डाटा ऑपरेटरों के वेतन भुगतान से संबंधित फाइल लेकर पहुंचे थे। सिविल सर्जन ने उनसे संचिका के संबंध में जानकारी मांगी। इस पर उन्होंने पूछा कि किस महीने की संचिका चाहिए, ताकि उसके अनुसार संबंधित रजिस्टर उपलब्ध कराया जा सके। आरोप है कि इसी बात पर सिविल सर्जन नाराज हो गए और उन्हें कार्यालय से बाहर जाने को कहा। समीर का दावा है कि इसी दौरान सिविल सर्जन ने उन्हें थप्पड़ मारने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने अपना चेहरा हटा लिया।

 

दूसरी ओर, सिविल सर्जन डॉ. राजनारायण प्रसाद ने पूरे मामले पर अपनी सफाई देते हुए कहा कि विवाद कंचन कुमारी की अनुपस्थिति से संबंधित था। उनके मुताबिक, संबंधित कर्मचारी पूरे महीने अनुपस्थित थीं और उन्होंने अपने स्तर से हरे पेन से अनुपस्थिति दर्ज की थी। इसके बावजूद अनुपस्थिति रजिस्टर में उपस्थिति से संबंधित हस्ताक्षर किए जाने का मामला सामने आया था। इसी को लेकर उन्होंने समीर कुमार से संबंधित संचिका और रजिस्टर प्रस्तुत करने को कहा था।

 

सिविल सर्जन ने कहा कि समीर कुमार गुप्ता गलत संचिका लेकर कार्यालय पहुंचे थे, जिस पर उन्हें फटकार लगाई गई थी। उन्होंने किसी भी तरह की बदसलूकी या थप्पड़ मारने की कोशिश से इनकार किया और सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया।

 

फिलहाल, वेतन भुगतान से जुड़ी संचिका और अनुपस्थिति रजिस्टर को लेकर शुरू हुआ यह विवाद स्वास्थ्य विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के बीच मामले को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।

 

 

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