सहरसा में मिथिलांचल की समृद्ध भाषा, साहित्य और संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 18 नवंबर को 35वें विद्यापति पर्व समारोह का आयोजन किया जाएगा। विद्यापति चेतना समिति वनगांव की ओर से बनगांव स्थित भगवती स्थान में आयोजित होने वाले इस समारोह की तैयारी शुरू कर दी गई है। कार्यक्रम में मिथिला के विद्वानों, साहित्यकारों, जनप्रतिनिधियों, मंत्रियों और कलाकारों के शामिल होने की संभावना है। समारोह को लेकर रविवार को रिफ्यूजी कॉलोनी स्थित नयन ज्योति चिकित्सा केंद्र में समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता विन्देश्वरी प्रसाद झा ने की, जबकि संचालन संयोजक जयराम झा ने किया।
बैठक में समारोह की रूपरेखा और तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की गई। संयोजक जयराम झा ने बताया कि 18 नवंबर को आयोजित होने वाला यह समारोह दो सत्रों में संपन्न होगा। कार्यक्रम के दौरान महाकवि विद्यापति के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विद्वानों द्वारा विचार-विमर्श किया जाएगा। इसके साथ ही मिथिला की भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने तथा आगे बढ़ाने पर भी चर्चा होगी।
समारोह में स्मारिका का विमोचन भी किया जाएगा। वहीं, मैथिली भाषा और मिथिला के विकास में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों को मिथिला रत्न सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से मिथिलांचल की लोककला, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान को प्रस्तुत किया जाएगा।
समिति के सदस्यों ने बताया कि विद्यापति पर्व समारोह का उद्देश्य महाकवि विद्यापति की साहित्यिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और मैथिली भाषा के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। आयोजन में मिथिला के विभिन्न क्षेत्रों से गणमान्य लोगों की भागीदारी रहेगी।
बैठक में पंडित तरुण झा, डॉ. संजय कुमार वशिष्ठ सहित समिति के कई सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने समारोह को सफल बनाने के लिए अपनी भूमिका निभाने पर सहमति जताई।






