रोहतास जिले में करीब 14 वर्षों से बंद पड़े पत्थर खनन उद्योग को दोबारा शुरू करने की तैयारी तेज हो गई है। वर्ष 2012 से बंद खनन कार्य को फिर से चालू करने की दिशा में जिला प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पहल और जिलाधिकारी दीपक कुमार मिश्रा के नेतृत्व में किए जा रहे प्रयासों के बाद सरकार ने फिलहाल चार खनन ब्लॉकों के लिए हरी झंडी दे दी है। इससे स्थानीय मजदूरों और कारोबारियों में रोजगार की नई उम्मीद जगी है।
खनन कार्य शुरू करने की राह में कई बाधाएं थीं, जिनमें करवंदिया पहाड़ी तक पहुंचने के रास्ते की समस्या प्रमुख थी। डीएम की पहल पर इस समस्या को दूर कर लिया गया है। साथ ही सरकार की गाइडलाइन के अनुसार बड़े क्षेत्र के बजाय छोटे-छोटे खनन ब्लॉक तैयार किए जा रहे हैं।
इसी सिलसिले में पटना से पहुंचे खनन विभाग के अधिकारियों ने खनन सहायक निदेशक मुकेश कुमार और जिला खनन पदाधिकारी अंजलि की मौजूदगी में करवंदिया और गिजवाही-2 पहाड़ी क्षेत्र का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने खनन क्षेत्रों तक पहुंचने वाले रास्तों और जरूरी व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इसके बाद जिलाधिकारी के साथ बैठक कर आगे की प्रक्रिया पर चर्चा की गई। इन दोनों क्षेत्रों में भी जल्द निविदा प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।
वहीं, जिला प्रशासन की पहल पर गायघाट और गिजवाही-1 खनन ब्लॉक के लिए निविदा प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी है। इन दोनों ब्लॉकों में 12 हेक्टेयर से अधिक जमीन खनन के लिए चिह्नित की गई है। निविदा में आवेदन करने की अंतिम तिथि 21 नवंबर निर्धारित की गई है।
डीएम दीपक कुमार मिश्रा ने बताया कि सरकार पत्थर खनन को लेकर गंभीर है। सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप खनन क्षेत्रों का चयन किया जा रहा है। करवंदिया में छोटे-छोटे ब्लॉक बनाने के लिए एसडीएम के नेतृत्व में गठित टीम ने अपनी रिपोर्ट भी तैयार कर ली है।
गौरतलब है कि खनन बंद होने से हजारों मजदूरों और कारोबारियों की आजीविका प्रभावित हुई थी। रोजगार की तलाश में बड़ी संख्या में लोगों को दूसरे राज्यों में पलायन करना पड़ा था। अब खनन शुरू होने से स्थानीय रोजगार के साथ परिवहन, क्रशर और अन्य संबंधित कारोबार को भी गति मिलने की उम्मीद है। साथ ही सरकार को राजस्व की प्राप्ति होगी। फिलहाल सबकी नजरें निविदा प्रक्रिया पूरी होने और खनन कार्य की वास्तविक शुरुआत पर टिकी हैं।






