भागलपुर। विक्रमशिला सेतु बंद होने के बाद भागलपुर में गंगा पार करने के लिए बियाडा घाट से बड़ी जहाजों के जरिए यात्रियों का आवागमन कराया जा रहा है। इस बीच स्थानीय नाविकों ने भी छोटी नावों के परिचालन की अनुमति देने की मांग उठाई है। अपनी मांगों को लेकर नाविक जिलाधिकारी के जनता दरबार पहुंचे और प्रशासन से रोजगार का अवसर उपलब्ध कराने की गुहार लगाई।
नाविकों का कहना है कि विक्रमशिला सेतु बंद होने के बाद गंगा पार करने के लिए यात्रियों की आवाजाही के वैकल्पिक इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन की ओर से बड़ी जहाजों का परिचालन कराया जा रहा है, लेकिन स्थानीय नाविकों को अभी तक छोटी नाव चलाने की अनुमति नहीं मिली है। ऐसे में उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो रहा है।
कर्ज लेकर खरीदी नाव, अब परिचालन की अनुमति का इंतजार
नाविकों ने बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर छोटी नावें खरीदी थीं। उन्हें उम्मीद थी कि विक्रमशिला सेतु बंद होने के बाद गंगा पार कराने के लिए उनकी नावों को भी परिचालन का अवसर मिलेगा। इससे उन्हें रोजगार मिलेगा और परिवार का भरण-पोषण करने में मदद मिलेगी। लेकिन अनुमति नहीं मिलने के कारण उनकी नावें खड़ी हैं और वे आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
नाविकों के मुताबिक, पहले भी उनकी नावों के माध्यम से यात्रियों को गंगा पार कराया जाता था। उस दौरान यात्रियों से किराया नहीं लिया जाता था, बल्कि जिला प्रशासन की ओर से नाविकों को इसके बदले भुगतान किया जाता था। इसी व्यवस्था के आधार पर उन्हें उम्मीद है कि प्रशासन एक बार फिर उन्हें परिचालन का अवसर देगा।
जलस्तर कम होने के बाद अनुमति देने की मांग
नाविकों ने बताया कि पहले गंगा में पानी का स्तर अधिक होने के कारण छोटी नावों के परिचालन की अनुमति नहीं मिल पा रही थी। हालांकि, अब जलस्तर कम होने के बाद वे परिचालन शुरू करने की अनुमति मांग रहे हैं।
उन्होंने जिला प्रशासन को भरोसा दिलाया कि छोटी नावों के परिचालन के दौरान निर्धारित सभी नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन करने के लिए वे तैयार हैं। नाविकों ने प्रशासन से मांग की कि उनकी नावों की स्थिति और सुरक्षा व्यवस्था का आकलन कर उन्हें परिचालन की अनुमति दी जाए।
अब नाविकों को जिला प्रशासन के निर्णय का इंतजार है। यदि उन्हें अनुमति मिलती है, तो इससे यात्रियों को आवागमन के लिए एक अतिरिक्त विकल्प मिल सकता है और स्थानीय नाविकों की आजीविका को भी सहारा मिल सकता है। हालांकि, छोटी नावों के परिचालन को लेकर प्रशासन की ओर से अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है।






