पूर्वी चंपारण। आवास योजना की सूची से पात्र लाभुकों के नाम कथित तौर पर हटाए जाने के विरोध में मलकौनिया पंचायत के मुखिया बाबूलाल प्रसाद आर्य ने मंगलवार को ढाका प्रखंड कार्यालय परिसर में अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू कर दिया। मुखिया के अनशन पर बैठने की जानकारी मिलते ही प्रखंड कार्यालय परिसर में लोगों की भीड़ जुटने लगी।
मुखिया बाबूलाल प्रसाद आर्य का आरोप है कि पंचायत में कई ऐसे परिवार हैं, जो आवास योजना के लाभ के पात्र हैं, लेकिन उनके नाम सूची से हटा दिए गए हैं। उनका कहना है कि सूची से नाम हटाए जाने के कारण जरूरतमंद और गरीब परिवार सरकारी आवास योजना के लाभ से वंचित होने की स्थिति में हैं।
मुखिया ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पात्रता रखने वाले लाभुकों के नाम किन परिस्थितियों में सूची से हटाए गए, इसकी निष्पक्ष तरीके से जांच होनी चाहिए। साथ ही जांच के बाद पात्र पाए जाने वाले परिवारों के नाम दोबारा सूची में शामिल कर उन्हें योजना का लाभ दिलाया जाए।
आमरण अनशन के दौरान मुखिया ने कहा कि पंचायत के गरीब और जरूरतमंद परिवारों को आवास योजना का लाभ दिलाना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होती और पात्र लाभुकों के मामले में आवश्यक कदम नहीं उठाए जाते, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा।
मुखिया के आमरण अनशन के बाद अब यह मामला प्रशासन के लिए भी महत्वपूर्ण हो गया है। प्रखंड कार्यालय परिसर में लोगों की मौजूदगी के बीच सभी की नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
वहीं, स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि आवास योजना की सूची तैयार करने के दौरान पात्रता का आकलन किस आधार पर किया गया और कथित तौर पर पात्र लाभुकों के नाम सूची से हटने की स्थिति कैसे बनी। हालांकि, इन आरोपों पर प्रशासन की ओर से आधिकारिक तौर पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है।
अब देखना होगा कि मुखिया के आमरण अनशन के बाद प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और कथित तौर पर सूची से हटाए गए लाभुकों की पात्रता की जांच कब तक पूरी होती है। साथ ही जांच के बाद पात्र परिवारों को आवास योजना का लाभ मिल पाता है या नहीं, इस पर भी लोगों की नजर बनी हुई है।






