हाजीपुर नगर परिषद में लेखापाल मनीष कुमार की पुनर्बहाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मामला आर्थिक अपराध इकाई के थाना कांड संख्या 10/26 से जुड़ा है। नगर परिषद के उपलब्ध कार्यालय आदेश के अनुसार, 16 जून 2026 को आपराधिक मामले में अनुसंधान लंबित रहने के कारण मनीष कुमार को निलंबित किया गया था।
निलंबन के बाद मनीष कुमार ने इसे वापस लेने का अनुरोध किया। इस मामले में नगर परिषद की ओर से ली गई कानूनी राय में सुप्रीम कोर्ट के Ajay Kumar Choudhary बनाम Union of India मामले में दिए गए सिद्धांत का हवाला दिया गया। कानूनी राय के अनुसार, यदि निलंबन के तीन महीने के भीतर आरोप पत्र या चार्जशीट दाखिल नहीं होती है, तो निलंबन को आगे जारी रखने का आधार नहीं रहता।
दस्तावेज में यह भी उल्लेख किया गया है कि संबंधित आर्थिक अपराध मामले में जांच अभी लंबित है और अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है। इसी कानूनी राय के आधार पर 18 सितंबर 2026 को नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी ने 16 जून को जारी निलंबन आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया।
इसके बाद मनीष कुमार को प्रधान सहायक-सह-लेखापाल के पद पर पुनर्बहाल कर दिया गया। आदेश में संबंधित शाखा की संचिकाएं, अभिलेख, पंजी, रोकड़ बही और अन्य दस्तावेज एक सप्ताह के भीतर उन्हें सौंपने का निर्देश भी दिया गया है।
यहीं से इस पूरे मामले को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। जब आर्थिक अपराध मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है और चार्जशीट भी दाखिल नहीं हुई है, तो जांच लंबित रहने के दौरान संबंधित कर्मचारी को उसी पद की जिम्मेदारी सौंपने को लेकर नगर परिषद ने कौन-कौन सी प्रशासनिक प्रक्रिया अपनाई?
हालांकि, उपलब्ध दस्तावेज के मुताबिक मनीष कुमार की पुनर्बहाली कानूनी राय और तीन महीने की निलंबन अवधि से जुड़े प्रावधानों के आधार पर की गई है। वहीं, आर्थिक अपराध मामले में जांच अभी जारी है। ऐसे में मामले की अंतिम कानूनी स्थिति जांच पूरी होने और न्यायालय की आगे की कार्यवाही के बाद ही स्पष्ट होगी।





