नालंदा। नालंदा विश्वविद्यालय के विश्वामित्रालय सभागार में विकसित भारत के निर्माण में भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका को लेकर दो दिवसीय राष्ट्रीय परिसंवाद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, तकनीकी संस्थानों के निदेशक, शिक्षाविद और फैकल्टी सदस्य शामिल हुए। कार्यक्रम में राज्यपाल को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया।
मीडिया से बातचीत के दौरान राज्यपाल ने कहा कि विकसित भारत का निर्माण किस तरह किया जाए और इसमें भारतीय ज्ञान परंपरा की क्या भूमिका हो सकती है, इसी उद्देश्य से नालंदा विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय परिसंवाद आयोजित किया गया है। उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों से कई प्रतिष्ठित शिक्षाविद और संस्थानों के प्रतिनिधि इस कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे हैं।
राज्यपाल के मुताबिक, विकसित भारत के निर्माण में भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका महत्वपूर्ण है। दो दिनों तक चलने वाला यह राष्ट्रीय परिसंवाद शिक्षा, ज्ञान और भारतीय परंपराओं को आधुनिक विकास से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण चर्चा का मंच बनेगा।
वहीं, नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति सचिन चतुर्वेदी ने बताया कि कार्यक्रम में देशभर के 15 से अधिक विश्वविद्यालयों के कुलपति और 12 से ज्यादा तकनीकी संस्थानों के निदेशक शामिल हुए हैं। परिसंवाद में भारतीय ज्ञान परंपरा और इंडियन नॉलेज सिस्टम को लेकर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
कुलपति ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षा व्यवस्था में शामिल करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में देश के अलग-अलग विश्वविद्यालय स्थानीय स्तर पर भारतीय ज्ञान परंपरा को किस तरह शिक्षा व्यवस्था में लागू कर रहे हैं, इस पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
नालंदा विश्वविद्यालय की योजना बिहार के सभी विश्वविद्यालयों के साथ-साथ झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे पड़ोसी राज्यों के विश्वविद्यालयों को भी इस पहल से जोड़ने की है। परिसंवाद में कुलपति, संस्थानों के निदेशक और फैकल्टी सदस्य अपने विचार साझा करेंगे।
कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षा और भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से विश्वविद्यालयों को विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप तैयार करने पर मंथन करना है। आने वाले 50 वर्षों के विकास लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए दो दिनों तक विभिन्न विषयों पर गहन चर्चा होगी।






