भागलपुर के सबौर स्थित बिहार कृषि विश्वविद्यालय के बीएसी फार्म में गंगा नदी के बढ़े जलस्तर ने किसानों और वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। गंगा का पानी बढ़ने से विश्वविद्यालय के करीब 67 एकड़ क्षेत्र में लगी धान की फसल पूरी तरह जलमग्न हो गई है। प्रभावित क्षेत्र में राइस एरिया के साथ एल-ब्लॉक, एम-ब्लॉक, एन-ब्लॉक, के-ब्लॉक और जे-ब्लॉक शामिल हैं।
इन सभी प्रक्षेत्रों में धान की 17 अलग-अलग किस्मों का रोपण किया गया था। खास बात यह है कि करीब 47.85 एकड़ में ब्रीडर बीज उत्पादन के उद्देश्य से धान की फसल लगाई गई थी। बाढ़ के पानी में फसल डूबने से विश्वविद्यालय का महत्वपूर्ण बीज उत्पादन कार्यक्रम भी गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। इसके अलावा करीब 10 एकड़ में फैला मॉडल भिट्ठी फार्म भी पानी में डूब गया है।
स्थिति का जायजा लेने के लिए बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के कुलपति ने विश्वविद्यालय के निदेशकों, वैज्ञानिकों और संबंधित अधिकारियों के साथ बाढ़ प्रभावित प्रक्षेत्रों का निरीक्षण किया। इस दौरान जलभराव की स्थिति, फसल पर संभावित असर और भविष्य में नुकसान को कम करने के उपायों पर चर्चा की गई।
कुलपति ने सुझाव दिया कि बाढ़ की स्थिति को देखते हुए धान की वर्तमान किस्मों की समीक्षा की जाए और जलभराव व बाढ़ सहन करने वाली उपयुक्त किस्मों के चयन पर काम किया जाए। साथ ही, गंगा में जलस्तर बढ़ने की संभावित अवधि को ध्यान में रखते हुए नर्सरी और धान की रोपाई पहले पूरी करने की संभावनाओं पर वैज्ञानिक अध्ययन करने को कहा गया।
निरीक्षण के दौरान फार्म से पानी की निकासी को लेकर भी चिंता जताई गई। बाढ़ के पानी की जल्द निकासी और गंगा के पानी के अनियंत्रित प्रवेश को रोकने के लिए तकनीकी प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया गया है।
विश्वविद्यालय के अनुसार, पिछले चार-पांच वर्षों से गंगा के बढ़े जलस्तर के कारण फार्म के निचले हिस्सों में बार-बार जलजमाव हो रहा है। इससे अनुसंधान और बीज उत्पादन दोनों प्रभावित होते हैं। अब विश्वविद्यालय तत्काल नुकसान के आकलन के साथ भविष्य के लिए स्थायी बाढ़ नियंत्रण और जल निकासी व्यवस्था की कार्ययोजना तैयार करेगा।






