भागलपुर: सबौर प्रखंड के इंग्लिश गांव में गंगा का कटाव अब ग्रामीणों के लिए महज खतरा नहीं, बल्कि उनके वर्षों की मेहनत और सपनों के उजड़ने की त्रासदी बन गया है। देर रात से अहले सुबह तक गंगा की तेज धारा ने करीब 10 पक्के मकानों को अपनी आगोश में ले लिया। कई अन्य घर अब भी कटाव के मुहाने पर हैं। हालात को देखते हुए ग्रामीणों ने अपने आशियाने खाली करने शुरू कर दिए हैं।
कटाव से महज कुछ मीटर की दूरी पर भगवान यादव का मकान था। खतरे को देखते हुए उन्होंने घर खाली कर दिया। वहीं मणि भूषण चौबे ने भी अपना पूरा मकान खाली कर दिया है। ग्रामीणों को डर है कि गंगा की तेज धार कब किसके घर को अपनी चपेट में ले ले, इसका कोई भरोसा नहीं।
सबसे ज्यादा दर्द उन परिवारों का है, जिन्होंने अपनी आंखों के सामने जीवनभर की कमाई को गंगा में समाते देखा। बाढ़ पीड़ित राधे साह के मुताबिक, उनका पूरा घर नदी में चला गया। तन पर पहने कपड़ों के अलावा कुछ भी नहीं बचा। घर में रखे गहने-जेवरात, फ्रिज, टीवी, कपड़े और अन्य सामान के साथ जमा की गई पूंजी भी गंगा में बह गई। परिवार कुछ समझ पाता, उससे पहले सब कुछ खत्म हो चुका था।
ग्रामीणों का कहना है कि इंग्लिश गांव में कटाव कोई पहली घटना नहीं है। वर्ष 2023 और 2024 में भी यहां गंगा ने भारी तबाही मचाई थी। कटाव रोकने के लिए इसी इलाके में कटावरोधी कार्य कराया गया था, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि वह काम भी अब गंगा में विलीन हो चुका है।
कटाव शुरू होने के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर जल संसाधन विभाग ने बचाव कार्य शुरू किया है। गंगा किनारे बालू से भरी बोरियां डाली जा रही हैं। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि इतनी तेज धारा के सामने बालू की बोरियां कितनी देर टिक पाएंगी, यह बड़ा सवाल है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल मजबूत और प्रभावी कटावरोधी कार्य कराने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाया गया तो कई और घर गंगा में समा सकते हैं।








