बोकारो के पिंड्राजोड़ा थाना क्षेत्र में पिपराटांड़ के पास फोरलेन पर हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आईटीआई मोड़ से उकरीद मोड़ के बीच तेज रफ्तार कोयला लदे ट्रक ने बाइक सवार युवक को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। हादसा इतना गंभीर था कि बाइक सवार की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान विक्रम उर्फ चीकू के रूप में बताई जा रही है।
हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय ग्रामीणों ने ट्रक को पकड़ लिया और इसकी सूचना पिंड्राजोड़ा पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और दुर्घटनाग्रस्त ट्रक को जब्त कर लिया।
लेकिन इस हादसे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल पुलिस की निगरानी व्यवस्था को लेकर उठ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस सड़क पर कोयला लदे भारी वाहन तेज रफ्तार से दौड़ते हैं। इतना ही नहीं, इलाके में कथित रूप से अवैध कोयला परिवहन की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। ऐसे में सवाल है कि आखिर इन वाहनों की रफ्तार और परिवहन व्यवस्था पर पहले से प्रभावी निगरानी क्यों नहीं की जाती?
ग्रामीणों का कहना है कि अगर सड़क पर भारी वाहनों की नियमित जांच और रफ्तार पर नियंत्रण होता, तो शायद इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता था। हादसे के बाद पुलिस की कार्रवाई जरूर हुई, लेकिन सवाल यह है कि कार्रवाई हादसे से पहले क्यों नहीं दिखाई देती?
विक्रम की मौत ने एक परिवार को गहरा सदमा दिया है। अब जरूरत है कि प्रशासन इस मार्ग पर तेज रफ्तार और कथित अवैध कोयला परिवहन के आरोपों की गंभीरता से जांच करे, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।
सवाल सीधा है—पुलिस की नजर भारी वाहनों पर हादसे से पहले पड़ेगी या फिर किसी अगली मौत के बाद?








